विक्रमशिला सेतु महा-हादसा: मैं CWC की बैठक से लौट रहा था और पैरों के नीचे पुल कांप रहा था – डॉ. डीपी सिंह की आपबीती

न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
कल रात का अनुभव मेरे जीवन का एक ऐसा क्षण है जिसे मैं शायद कभी भूल नहीं पाऊंगा। मैं हैदराबाद में आयोजित CWC (Central Working Committee) की बैठक से लौटकर भागलपुर आ रहा था। जब मेरी गाड़ी विक्रमशिला सेतु पर पहुँची, तो मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में क्या होने वाला है।

वो डरावना कंपन और अज्ञात भय
लगभग रात के 11:30 बजे मैं पुल को पार कर रहा था। उसी समय से ही मुझे पुल की स्थिति कुछ असामान्य लगने लगी थी। पुल पर हल्का जाम था, जिसके कारण मेरी गाड़ी कुछ देर के लिए वहीं रुक गया। उसी दौरान मुझे पुल के भीतर एक अजीब सा कंपन महसूस हुआ। उस कंपन ने मेरे मन में अचानक एक अज्ञात भय पैदा कर दिया। मुझे तुरंत याद आया कि कुछ दिन पहले ही मीडिया में पुल में दरार आने की खबरें आई थीं। उस वक्त मन में गहरी आशंका हुई कि कहीं उसी दरार की वजह से कोई गंभीर समस्या तो नहीं हो रही।

मौत से चंद मिनटों का फासला
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। करीब 11:55 बजे के आसपास पुल के गिरने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, लेकिन मैं ठीक उसी समय वहां से निकल चुका था। आज सुबह जब यह समाचार मिला कि उसी पुल का एक हिस्सा गंगा में गिर गया है, तो मैं स्तब्ध रह गया। उस पल मुझे गहराई से एहसास हुआ कि माँ गंगा ने न केवल मुझे, बल्कि उस समय पुल पर मौजूद सैकड़ों लोगों को एक बहुत बड़े हादसे से बचा लिया।

व्यवस्था पर सुलगते सवाल
यह सोचना वाकई विचलित करने वाला है कि वर्ष 2001 में बना यह पुल मात्र 25 साल के भीतर ही इस तरह क्षतिग्रस्त कैसे हो गया? यह निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासनिक देखरेख पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मैं माँ गंगा का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने हमें सुरक्षा प्रदान की।