बिहार में जमीन और मकान की रजिस्ट्री कराने वाले आम लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने डिजिटल डीड (Digital Deed) में होने वाली मानवीय और तकनीकी त्रुटियों को सुधारने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
अब निबंधन दस्तावेजों में हुई टाइपिंग, स्कैनिंग या डेटा एंट्री की गलतियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर ठीक किया जा सकेगा।
जानिए कि आम आदमी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
अक्सर देखा जाता था कि रजिस्ट्री के समय ऑपरेटर की गलती से नाम, खाता, खेसरा या रकबा गलत दर्ज हो जाता था, जिसे सुधरवाने के लिए लोगों को महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब नई व्यवस्था के तहत जवाबदेही तय कर दी गई है।
सुधार की समय सीमा: चरणों में समझें
विभाग ने अलग-अलग स्तरों पर सुधार के लिए 3 से 7 दिनों का समय निर्धारित किया है:
प्रारंभिक जांच: निबंधन पदाधिकारी को त्रुटि की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।
सत्यापन और आदेश: प्रमंडलीय सहायक निबंधन महानिरीक्षक स्तर पर भौतिक सत्यापन और आदेश पारित करने के लिए 7 दिन निर्धारित हैं।
अपडेट प्रक्रिया: विभागीय प्रभारी पदाधिकारी 3 कार्यदिवस के भीतर और सिस्टम इंटीग्रेटर (SI) 5 कार्यदिवस के अंदर डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट करेंगे।
कुल समय: किसी भी हाल में सुधार की पूरी प्रक्रिया 22 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
किन गलतियों में होगा सुधार?
नई SOP के तहत निम्नलिखित तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों को पारदर्शी तरीके से सुधारा जा सकेगा:
नाम, पता, अंक, खाता और खेसरा की टाइपिंग मिस्टेक।
पीडीएफ अपलोड करते समय पृष्ठों का कट जाना या धुंधली (Unclear) इमेज होना।
गलत दस्तावेज या किसी दूसरे डीड का पृष्ठ अपलोड हो जाना।
सावधानी: मूल दस्तावेज में बदलाव नहीं
यह समझना जरूरी है कि यह सुधार केवल डिजिटल रिकॉर्ड में हुई लिपिकीय या तकनीकी गलतियों के लिए है। यदि मूल दस्तावेज (Original Deed) में ही कोई गंभीर त्रुटि है, तो उसके लिए सुधारक डीड (Rectification Deed) या कैंसिल डीड तैयार करानी होगी। इसके अलावा, मूल पंजीकरण संख्या, तिथि और पक्षकारों की विधिक स्थिति में सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।
सरकार का यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है। इससे न केवल भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता को अपनी ही संपत्ति के सही रिकॉर्ड के लिए दफ्तरों में होने वाली परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी।
































