बिहार कैबिनेट विस्तार की उलटी गिनती शुरू: अगले हफ्ते शपथ ले सकते हैं 27 नए मंत्री, 6 सीटें खाली रखने के पीछे बड़ी रणनीति

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने वर्तमान 3 सदस्यीय मंत्रिमंडल का विस्तार कर मंत्रियों की कुल संख्या 30 करने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण राजनैतिक घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री ने शनिवार को नीतीश कुमार और विजय चौधरी के साथ गहन विचार-विमर्श किया, जिसके बाद वे नामों पर अंतिम मुहर लगवाने दिल्ली रवाना हो गए हैं।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार कैबिनेट के नियमों के अनुसार, मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में केवल 3 मंत्री कार्यरत हैं, जिसे बढ़ाकर अब 30 किया जा रहा है। हालांकि, सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भविष्य के राजनैतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 6 से 8 पद जानबूझकर खाली रखे जा रहे हैं।

खाली सीटों के पीछे की कहानी
मंत्रिमंडल में सीटें खाली रखना महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है :-

टूट-फूट से बचाव: एनडीए भविष्य में किसी भी संभावित असंतोष या टूट-फूट की स्थिति में नए चेहरों को शामिल करने की गुंजाइश रखना चाहता है।

गठबंधन में संतुलन: सहयोगी दलों के बीच सामंजस्य बिठाने और किसी भी नाराजगी को दूर करने के लिए इन खाली सीटों का उपयोग ‘बफर’ के तौर पर किया जा सकता है।

संभावित चेहरों पर एक नजर
कैबिनेट विस्तार में विभिन्न दलों से इन प्रमुख नामों की चर्चा जोरों पर है:

जदयू (JDU): भगवान सिंह कुशवाहा, बुलो मंडल, श्रवण कुमार, लेसी सिंह, अशोक चौधरी, सुनील कुमार और मदन सहनी के मंत्री बनने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा रत्नेश सदा और शीला मंडल को भी दोबारा मौका मिल सकता है।

भाजपा (BJP): नीतीश मिश्रा, सुनील कुमार पिंटू, मंगल पांडेय, और श्रेयसी सिंह रेस में आगे हैं। भूमिहार कोटे से रजनीश कुमार, कुमार शैलेन्द्र या अनिल शर्मा में से किसी एक पर मुहर लग सकती है।

अन्य दल: लोजपा (आर) से संजय कुमार और ‘हम’ से संतोष सुमन का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा या उनके बेटे दीपक प्रकाश को शामिल करने पर मंथन जारी है।

दिल्ली में मंथन और पश्चिम बंगाल का एंगल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ नामों की अंतिम सूची फाइनल करेंगे। सूत्रों का यह भी मानना है कि कैबिनेट विस्तार की सटीक टाइमिंग काफी हद तक पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों पर निर्भर कर सकती है।