ट्रेंडिंग टुडे
-
बिहार बोर्ड मैट्रिक परिणाम: केवल अंकों का अंबार नहीं, गुणवत्ता और सामाजिक बदलाव का नया ‘मार्कशीट’
-
सियासी रसूख के आगे बौनी होती लोकतांत्रिक संस्थाएं: जब ‘माननीयों’ ने भुला दी संसदीय मर्यादा
-
सरकार ने कहा है, बिहार में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगाम… जानिए इस सुधार में चुनौतियां क्या हैं, क्या ये इतना आसान है?
-
बिहार : 64% गर्भवती महिलाएं खून की कमी की शिकार, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती
-
बिहार में गैस संकट से औद्योगिक आपातकाल : पूर्णिया सहित कई जिलों में फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर, रूपेश कुमार सिंह ने उद्योग निदेशक को लिखा पत्र
-

सियासी रसूख के आगे बौनी होती लोकतांत्रिक संस्थाएं: जब ‘माननीयों’ ने भुला दी संसदीय मर्यादा
लोकतंत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह परंपराओं, शुचिता और संस्थागत सम्मान की नींव पर टिका होता है। लेकिन हाल के दिनों में बिहार की राजनीति ने जो मंजर देखा, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे रसूखदार राजनेता खुद को संवैधानिक संस्थाओं से भी ऊपर मानने लगे हैं? मुख्यमंत्री…
एडिटर्स कॉर्नर
-
एडिटर्स व्यू – सामाजिक एकता की बलि और वोट बैंक का ‘यूजीसी कार्ड’… सियासत को शर्म आनी चाहिए!
-
जब ‘मसीहा’ ही ‘सिंडिकेट’ चलाने लगे… लालू परिवार पर कोर्ट की टिप्पणी महज आरोप नहीं, एक राजनैतिक ‘पोस्टमार्टम’ है!
-
नीतीश कुमार का ‘टोपी प्रसंग’: प्रतीकों की राजनीति के निहितार्थ को समझिए
-
चुनावी मौसम में खत्म हो रही भाषा की मर्यादा, तो क्या जनता भी अपने ‘जूते’ तैयार रखे?
-
The News Scan आपका मंच है… आइए खुलकर बोलिए क्योंकि खामोशी ही तो अन्याय की सबसे बड़ी ताकत है…







































