भरत तिवारी मामले पर आर-पार के मूड में चिराग पासवान; शाह से मुलाकात के बाद अब सम्राट चौधरी से करेंगे सीधी बात, क्या नपेंगे दोषी पुलिसवाले?

आरा में बिहार पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए भरत तिवारी की निर्मम हत्या के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान इस घटना को लेकर पूरी तरह आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान चिराग पासवान ने बिना किसी लाग-लपेट के इसे सीधे ‘हत्या’ करार दिया है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, आरा
लोजपा (आर) प्रमुख का यह कड़ा रुख और दिल्ली से लेकर पटना तक की राजनीतिक हलचल यह साफ संकेत दे रही है कि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों की मुश्किलें अब बहुत ज्यादा बढ़ने वाली हैं। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दिल्ली से हुई, जहां आरा में पीड़ित परिवार के बीच पहुंचने से ठीक एक दिन पहले चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस संवेदनशील मुद्दे पर विशेष मुलाकात की। देश के गृह मंत्री के सामने इस पूरे मामले को पुलिस द्वारा की गई ‘हत्या’ बताते हुए उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। किसी भी गठबंधन सरकार के सहयोगी दल के नेता द्वारा सीधे केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर राज्य की पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि चिराग पासवान इस मामले को ठंडे बस्ते में जाने देने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर एक बहुत बड़ा प्रशासनिक दबाव बना दिया है।
इसके बाद आज आरा पहुंचकर चिराग पासवान ने सीधे भरत तिवारी के बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान परिजनों का ढांढस बंधाते हुए चिराग पासवान ने बेहद भावुक लेकिन सख्त लहजे में कहा कि गया हुआ इंसान लौटकर नहीं आ सकते, मगर दोषियों के खिलाफ होने वाली कठोरतम कार्रवाई ही इस पीड़ित परिवार के जख्मों और उनके असहनीय दर्द को थोड़ा कम कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि वर्दी की आड़ में कानून का मखौल उड़ाने वाले इस जघन्य कृत्य में जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ हर हाल में सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चिराग पासवान ने यह भी साफ कर दिया है कि वे दिल्ली और आरा तक ही रुकने वाले नहीं हैं, बल्कि वे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे और इस मामले में दोषी पुलिसवालों पर फौरन सख्त एक्शन लेने की मांग करेंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को ईमानदारी और कानून के दायरे में रहकर काम करने की सख्त हिदायत दी थी, ऐसे में अपने ही एक प्रमुख सहयोगी दल के नेता द्वारा पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ मुख्यमंत्री से सीधे न्याय की मांग करना राज्य सरकार के लिए भी एक परीक्षा की घड़ी है। शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को बनाए रखने के लिए सरकार को इस मामले में बेहद त्वरित और पारदर्शी कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष के तौर पर देखें तो भरत तिवारी का मामला अब केवल एक स्थानीय अपराध या पुलिसिया ज्यादती का मामला नहीं रह गया है। चिराग पासवान ने जिस तरह इस मुद्दे पर अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी है, उसने इसे बिहार की कानून-व्यवस्था की साख का सवाल बना दिया है। चिराग ने स्पष्ट कहा है कि अगर किसी ने आत्मसमर्पण कर दिया तो गोली कैसे चलाई जा सकती है।