भरत तिवारी एनकाउंटर : सरकार ने मानी चूक! सीएम सम्राट ने किया नौकरी और मुआवजे का ऐलान, लेकिन परिजनों ने रख दी ये बड़ी शर्त

बिहार के बहुचर्चित भोजपुर (शाहपुर) के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस थ्योरी और वायरल वीडियो के दावों के बीच, न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद सरकार बैकफुट पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी और मुआवजे का ऐलान किया है। हालांकि, बेटे को खोने वाली मां और परिवार इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, उन्होंने न्याय के लिए एक बड़ी शर्त सरकार के सामने रख दी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुए 28 वर्षीय भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इसे पुलिस की बड़ी चूक मानते हुए, राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को राहत देने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को घोषणा की है कि सरकार भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी और साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान करेगी। यह बड़ा फैसला पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार हर हाल में न्याय के साथ खड़ी है।

मुआवजा मंजूर, लेकिन परिवार को चाहिए ‘पूर्ण न्याय’
सरकार के इस फैसले पर बिलौटी स्थित भरत के घर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मृतक भरत की मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी ने सरकार के इस कदम का स्वागत तो किया है, लेकिन उनका साफ कहना है कि असली न्याय तभी मिलेगा जब दोषियों को सजा मिलेगी। परिजनों की मुख्य मांग है कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ, शाहपुर थानाध्यक्ष समेत सभी दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए। मां आशा देवी ने बताया कि 17 जून की सुबह करीब 8 बजे पुलिस उनके घर आई थी और बेटे भरत को अपने साथ ले गई थी।

मानवाधिकार आयोग भी सख्त, दिए जल्द गिरफ्तारी के निर्देश
इस मामले की गूंज बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में भी सुनाई दी। गुरुवार को इस मामले में एक घंटे तक सुनवाई हुई। इस दौरान गृह विभाग के अपर सचिव, एडीजी, डीआईजी और भोजपुर एसपी सहित कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। आयोग ने पुलिस महकमे को सख्त निर्देश दिया है कि मामले में नामजद सभी आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। बता दें कि पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे मामले के पर्यवेक्षण (सुपरविजन) की जिम्मेदारी शाहाबाद डीआईजी सत्य प्रकाश को सौंपी है।

अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

पहली गिरफ्तारी: घटना के 43 दिन बाद 30-31 जुलाई की रात एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार (गोली चलाने का आरोपी) को गिरफ्तार किया गया।

तबादला और निलंबन: जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा का तबादला कर दिया गया है। वहीं, शाहपुर थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।

जांच: हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में न्यायिक आयोग जांच कर रहा है।

जानिए… क्या था पूरा मामला?
17 जून 2026 को पुलिस और एसटीएफ ने भोजपुर के बिलौटी गांव में कार्रवाई की थी, जिसमें 28 वर्षीय भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि भरत ने फायरिंग की थी, जिसके जवाब में गोली चलानी पड़ी। लेकिन, घटना के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर दिख रहा था कि भरत हथियार डालकर सरेंडर कर रहा था। सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि भरत का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इसके बाद जनआक्रोश भड़क उठा था और पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा।