बिहार में ई-गवर्नेंस की बड़ी छलांग: सभी 8053 पंचायतों में खुलेंगे आधार सेवा केंद्र, जानें नागरिक सुविधाओं का पूरा प्लान

बिहार के ग्रामीण इलाकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। अब गांव के लोगों को अपना या परिवार का आधार कार्ड बनवाने और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए शहरों या प्रखंड कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बिहार का पंचायती राज विभाग एक ऐसा खाका तैयार कर रहा है, जिससे सूबे की सभी पंचायतों में ‘आधार सेवा केंद्र’ खोले जाएंगे। इस विशेष रिपोर्ट में समझिए सरकार के इस फैसले का ग्रामीण ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और आम जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। गांव के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के पहुंचाने के लिए पंचायत सरकार भवनों को अब सही मायनों में ‘मिनी सचिवालय’ का रूप दिया जा रहा है।

  1. क्या है सरकार का मास्टर प्लान?
    योजना के तहत बिहार की सभी 8053 पंचायतों में आधार सेवा केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके लिए पंचायती राज विभाग और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के बीच जल्द ही एक करार होने जा रहा है, जिसका मसौदा तैयार हो चुका है।

संसाधन और संचालन: समझौते के मुताबिक, पंचायती राज विभाग इन केंद्रों के लिए कंप्यूटर सहित सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराएगा।

लाइसेंस प्रक्रिया: इन केंद्रों का संचालन सीएससी के कर्मी करेंगे। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद यूआईडीएआई (UIDAI) द्वारा सीएससी को आधार सेवा केंद्र चलाने के लिए जरूरी लाइसेंस दिया जाएगा।

  1. आम नागरिकों को मिलेगी 64 तरह की सुविधाएं
    इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पंचायत स्तर पर ही 64 प्रकार की नागरिक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी।

शुल्क और मुफ्त सेवाएं: नया आधार कार्ड बनवाने के लिए 75 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए जाति, आय, आवास, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित कुल 21 तरह की सेवाओं के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर नकेल: अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों पर लगाम कसने के लिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित राशि से अधिक की मांग करने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अन्य प्रमुख सेवाएं: इन केंद्रों पर छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, पेंशन, राशन कार्ड अपडेट, जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation), ऑनलाइन लगान भुगतान, वाहन का डुप्लीकेट आरसी, बैंकिंग और बीमा सेवाएं (लोन, माइक्रो क्रेडिट), बिजली-पानी बिल भुगतान और यहां तक कि रेल, बस या हवाई टिकट बुकिंग की सुविधा भी मिलेगी।

  1. रेवेन्यू और रोजगार का नया मॉडल
    इस पूरी योजना को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए एक खास फॉर्मूला तय किया गया है:

राजस्व का बंटवारा: आधार सेवा केंद्र से प्राप्त होने वाली कुल आय में से 80 प्रतिशत हिस्सा सीएससी को मिलेगा, जबकि 20 फीसदी लाभ की राशि पंचायती राज विभाग के खाते में जाएगी।

कर्मियों का प्रबंधन: इन केंद्रों पर काम करने वाले कर्मियों को मानदेय का भुगतान सीएससी द्वारा ही किया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि ये कर्मी भविष्य में पंचायती राज विभाग के कर्मचारी होने का दावा नहीं कर सकेंगे, जिससे विभाग पर स्थायी रोजगार का कोई कानूनी या वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।

बिहार सरकार का यह कदम ग्रामीण प्रशासन के विकेंद्रीकरण (Decentralization) की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। पंचायत स्तर पर ही जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर जमीन के दाखिल-खारिज और बैंकिंग सेवाएं मिलने से न सिर्फ ग्रामीणों के समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि प्रखंड स्तर के दफ्तरों में व्याप्त लालफीताशाही और दलाली प्रथा पर भी करारी चोट लगेगी।