न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में साइबर अपराधियों और सिम वेंडरों के बीच चल रहे एक खतरनाक गठजोड़ का खुलासा हुआ है। अब तक अपराधी पहचान छिपाने के लिए फोटो बदलते थे, लेकिन इस बार मामला इसके ठीक उलट है। दूरसंचार विभाग (DoT) की जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने एक ही चेहरे का इस्तेमाल कर, अलग-अलग नाम और पते के साथ दर्जनों फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट कर लिए।
इस हाई-टेक धोखाधड़ी को पकड़ने में दूरसंचार विभाग के अत्याधुनिक एआई (AI) टूल ASTR ने मुख्य भूमिका निभाई है।
ASTR टूल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने ऐसे पकड़ा फर्जीवाड़ा
दूरसंचार विभाग की तकनीक ASTR (Artificial Intelligence and Facial Recognition powered Solution for Telecom SIM Subscriber Verification) ने डेटाबेस में मौजूद लाखों फोटो का मिलान किया। इस जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
चेहरा एक, पहचान अनेक: डिजिटल मिलान के दौरान पाया गया कि एक ही व्यक्ति की तस्वीर का उपयोग करके 10 से 30 अलग-अलग सिम कार्ड जारी किए गए।
वेंडरों की मिलीभगत: जांच के अनुसार, यह बिना सिम विक्रेताओं (POS) की मिलीभगत के संभव नहीं था। वेंडरों ने फर्जी केवाईसी (KYC) और जाली दस्तावेजों के आधार पर थोक में सिम कार्ड एक्टिवेट किए।
सटीक ट्रैकिंग: एआई टूल ने न केवल फर्जी सिम की पहचान की, बल्कि यह डेटा भी निकाल लिया कि ये सिम किस दुकान से, किस समय और किस लोकेशन से बेचे गए थे।
जांच के घेरे में सवा लाख विक्रेता
बिहार में वर्तमान में लगभग 1.25 लाख सिम विक्रेता सक्रिय हैं। विभाग अब इन सभी के डेटा का विश्लेषण कर रहा है। शुरुआती जांच के बाद कई वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने और उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इन फर्जी सिमों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर साइबर ठगी, बैंकिंग फ्रॉड और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा था।
महानिदेशक की चेतावनी: “दोषी कर्मचारी भी नहीं बचेंगे”
दूरसंचार विभाग (भारत सरकार) के महानिदेशक आनंद खरे ने पटना में बिहार सर्किल के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए:
कड़ी कानूनी कार्रवाई: फर्जी सिम जारी करने वाले वेंडरों के खिलाफ तत्काल पुलिस केस दर्ज हो।
विभागीय मिलीभगत पर वार: यदि दूरसंचार कंपनियों के किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन पर भी कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
नियमित मॉनिटरिंग: संदिग्ध सिमों को तुरंत ब्लॉक करने और एआई आधारित वेरिफिकेशन को और तेज करने के आदेश दिए गए हैं।
दूरसंचार महानिदेशकर आनंद खरे ने कहा, “साइबर सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। तकनीकी उपकरणों की मदद से हम हर उस जालसाज तक पहुंचेंगे जो कानून की आंखों में धूल झोंककर फर्जी सिम बेच रहा है।” (दूरसंचार)
पटना में बनेगा अत्याधुनिक मुख्यालय
समीक्षा बैठक के बाद महानिदेशक ने पटना के हार्डिंग रोड स्थित प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। यहाँ दूरसंचार विभाग बिहार सर्किल का नया और आधुनिक मुख्यालय बनाया जाएगा। इस नए भवन में साइबर सुरक्षा और डेटा मॉनिटरिंग के लिए उन्नत लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह के फ्रॉड को रीयल-टाइम में रोका जा सके।
































