
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
बिहार को औद्योगिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए केवल निवेश की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धरातल पर उद्यमियों को सुरक्षा और सुगमता देना भी अनिवार्य है। यह विचार वासमे फूड प्रोडक्ट्स के एमडी विक्रम सिन्हा ने व्यक्त किए हैं। उन्होंने उद्यमियों के हितों की वकालत करते हुए प्रशासन का ध्यान उन गंभीर समस्याओं की ओर खींचा है, जो राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के दावों को कमजोर कर रही हैं। साथ ही उन्होंने उद्योगमंत्री दिलीप जायसवाल के सिंगल विंडो सिस्टम को लेकर की गई घोषणा को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद जताई है।
उद्यमियों की राह में ‘अवैध वसूली’ का रोड़ा
विक्रम सिन्हा ने सबसे ज्वलंत मुद्दे के रूप में नगर निकायों में होने वाली अवैध वसूली को रेखांकित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों में स्टैंड ठेकेदारों द्वारा जबरन बैरियर लगाकर औद्योगिक वाहनों से अवैध वसूली की जा रही है। इस अवैध प्रक्रिया से न केवल व्यापार की लागत बढ़ रही है, बल्कि उद्यमियों और वाहन चालकों को मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को इस पर अविलंब रोक लगानी चाहिए ताकि सप्लाई चेन सुचारू रूप से चल सके। किसी भी तरह के एनओसी या कागजी प्रक्रिया में लालफीताशाही का सामना करना पड़ता है। इससे उद्यमियों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि, उद्योगमंत्री दिलीप जायसवाल ने सिंगल विंडो सिस्टम की घोषणा तो की है देखना होगा कि जमीन पर यह कितना प्रभावी हो पाता है। उन्होंने छोटे मालवाहक वाहनों को एमवीआई द्वारा अनावश्यक रूप से रोके जाने पर आपत्ति जताई है, जिससे माल की डिलीवरी में देरी होती है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मांग की है कि गुलाबबाग जैसे बड़े बाजार में स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्य में एक सुव्यवस्थित ‘औद्योगिक मार्केटिंग यार्ड’ विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर उठे सवाल
विक्रम सिन्हा के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों का वर्तमान ढांचा विकास की गति के अनुरूप नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत खराब है। नाले से पानी के निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके टेक्निकल ऑडिट की आवश्यकता है। साथ ही किसी भी फैक्ट्री से ड्रैनेज का कनेक्शन है ही नहीं। सड़कें सड़कें जर्जर स्थिति में हैं… कई जगह स्लैब बेतरतीब तरीके से बनाए गए हैं जिससे आवाजाही में भारी परेशानी होती है। औद्योगिक परिसरों में स्ट्रीट लाइट भी सही तरीके से नहीं जलते हैं। इसे भी दुरुस्त किया जाना चाहिए। उत्पादन की निरंतरता के लिए उन्होंने बियाडा क्षेत्र के लिए एक डेडिकेटेड पावर फीडर की मांग की है ताकि बिजली कटौती के कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सके। बियाडा क्षेत्र के ग्रिड से बाहरी क्षत्रों में भी कनेक्शन दिया गया है। बाहर किसी तरह की दिक्कत आने से अंदर के क्षेत्र की भी सप्लाई बाधित हो जाती है। बिना पूर्व सूचना के घंटों शटडाउन ले लिया जाता है जिससे उत्पाद की क्वालिटी और क्वाांटिटी में फर्क आ जाता है। प्रोडक्शन कॉस्ट पर भी असर पड़ता है।
जिला स्तरीय इंडस्ट्रियल कमेटी का सुझाव
भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए विक्रम सिन्हा ने सुझाव दिया कि जिले में एक ‘जिला स्तरीय इंडस्ट्रियल कमेटी’ का गठन किया जाना चाहिए। यह कमेटी न केवल मौजूदा उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करेगी, बल्कि नए स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देकर राज्य में निवेश का बेहतर माहौल तैयार करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और प्रशासन इन बातों पर ध्यान दे तो निश्चित तौर पर पूर्णिया औद्योगिक नक्शे पर ताकत के साथ चमक सकता है।
































