न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में अब अपराधियों की खैर नहीं है। पुलिस की कार्यशैली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद, बिहार पुलिस अब ‘ड्रोन यूनिट’ के जरिए आसमान से निगरानी करेगी। यह न केवल अपराधियों को पकड़ने में मददगार होगा, बल्कि आम जनता के लिए ट्रैफिक नियमों के पालन को भी अनिवार्य बना देगा। बिहार पुलिस का यह ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी है। जब अपराधी को पता होगा कि ऊपर से कोई उसे देख रहा है, तो अपराध की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी।
बिहार ऐसा करने वाला देश का पांचवां राज्य (केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात के बाद) बनने जा रहा है। आइए समझते हैं कि 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली यह यूनिट बिहार की सुरक्षा व्यवस्था को कैसे पूरी तरह बदल देगी।
- दियारा और दुर्गम क्षेत्रों में खत्म होगी अपराधियों की ‘सेफ हेवन’
बिहार के भौगोलिक ढांचे में ‘दियारा’ (नदी तटीय क्षेत्र) और घने जंगल अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण वहां पुलिस का तुरंत पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता था।
समाधान: पुलिस अब 10 किमी की रेंज वाले हाई-क्वालिटी ड्रोन्स का इस्तेमाल करेगी।
थर्मल इमेजिंग: ये ड्रोन थर्मल कैमरों से लैस होंगे, जिससे अंधेरे या धुएं के बीच भी छिपे हुए अपराधियों या संदिग्ध गतिविधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
- ट्रैफिक मैनेजमेंट: अब ऑटोमैटिक कटेगा ई-चालान
राजधानी पटना समेत बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और नियमों का उल्लंघन एक बड़ी समस्या है। अब पुलिसकर्मी के मौके पर मौजूद न होने पर भी आप बच नहीं पाएंगे।
ANPR टेक्नोलॉजी: ड्रोन्स में ‘ऑटो नंबर प्लेट रिकग्निशन’ (ANPR) सिस्टम होगा। हवा में उड़ते हुए ही ड्रोन सड़क पर चलते वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा।
सटीकता: यदि कोई रेड लाइट जंप करता है या गलत दिशा में चलता है, तो ड्रोन की मदद से सीधे उनके घर पर ई-चालान भेज दिया जाएगा।
- भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील आयोजनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
त्योहारों, राजनीतिक रैलियों या विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना हमेशा से चुनौती रहा है।
रियल टाइम डेटा: ड्रोन 100 मीटर की ऊंचाई से 45 मिनट तक लगातार उड़ान भरकर कंट्रोल रूम को लाइव फीड देंगे। इससे पुलिस बल को सही समय पर सही दिशा में तैनात करने में मदद मिलेगी।
- STF और जिलों का सुदृढ़ीकरण
इस परियोजना के तहत कुल 50 ड्रोन खरीदे जा रहे हैं।
वितरण: राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों को एक-एक ड्रोन दिया जाएगा।
STF की ताकत: विशेष कार्य बल (STF) को 10 ड्रोन दिए जाएंगे, जिससे वे संगठित अपराध और नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में और अधिक सटीक प्रहार कर सकेंगे।
स्मार्ट पुलिसिंग का ‘ब्रॉडर विजन’
सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बिहार पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर और फोरेंसिक जांच पर भी भारी निवेश कर रही है:
FSL लैब का विस्तार: मार्च तक राज्य में 7 नई फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) शुरू हो जाएंगी (पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में पहले से कार्यरत हैं)। इससे आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर: लोदीपुर में STF का नया मुख्यालय और 11 नए थाना भवनों के निर्माण के लिए 384 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

































