बिहार में शहरीकरण की तस्वीर अब बदलने वाली है। राज्य सरकार ने 11 ‘सेटेलाइट टाउनशिप’ को विशेष थीम पर विकसित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इन टाउनशिप में न केवल आधुनिक घर होंगे, बल्कि वहां खेल, फिल्म-उद्योग, शिक्षा और पर्यटन के बड़े केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। नगर विकास विभाग ने इसके लिए जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक लगाकर मास्टर प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
आइए विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि इस प्रोजेक्ट में आपके लिए क्या खास है।
आपकी जरूरत की हर सुविधा एक जगह
इन टाउनशिप को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वहां रहने वालों को सड़क, पार्क, स्कूल और खेल के मैदान जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं परिसर के भीतर ही मिलेंगी। खास बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए भी यहां विशेष आवास योजनाएं होंगी।
किस जिले को क्या मिला?
सरकार ने स्थानीय विशेषता के आधार पर हर टाउनशिप की पहचान तय की है:
पटना (पाटलिपुत्र): इसे एजुकेशनल-स्पोर्ट्स सिटी और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में पहचाना जाएगा।
पूर्णिया: यहां मेडिकल हब और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगा।
सोनपुर (हरिहरनाथपुरम): इसे दिल्ली की तर्ज पर ‘एयरोसिटी’ बनाया जाएगा।
गया (मगध): इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाया जाएगा।
दरभंगा (मिथिला): यहां मेडिकल हब के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को सहेजा जाएगा।
भागलपुर (विक्रमशिला): इसे शिक्षा और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी।
मुजफ्फरपुर (तिरहुत): यहां औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र विकसित होगा।
फिल्म और खेल पर विशेष जोर
टाउनशिप के ‘कोर क्षेत्र’ में फिल्म सिटी और स्पोर्ट्स सिटी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य बिहार की प्रतिभा को राज्य के भीतर ही मंच देना और बड़े स्तर पर रोजगार पैदा करना है। ‘बिहार शहरी योजना स्कीम नियमावली 2026’ के तहत इन परियोजनाओं को रफ्तार दी जा रही है।
सरकार का यह कदम बिहार से होने वाले पलायन को रोकने में मददगार साबित होगा। जब मेडिकल, शिक्षा और मनोरंजन जैसी सुविधाएं छोटे शहरों के पास उपलब्ध होंगी, तो न केवल जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
































