सम्राट मंत्रिमंडल का जातीय गणित: राजपूतों का दबदबा, जानें कैबिनेट में सवर्ण समुदाय के कितने चेहरों को मिली जगह?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का एक नया खाका खींचा गया है। मुख्यमंत्री ने अपनी टीम में न केवल क्षेत्रीय संतुलन साधा है, बल्कि जातीय समीकरणों के जरिए 2025 के विधानसभा चुनावों की बिसात भी बिछा दी है।

सवर्ण समुदाय की हिस्सेदारी: कुल 9 मंत्री
दिए गए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 35 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सवर्ण समुदाय (राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण और कायस्थ) से कुल 9 मंत्रियों को शामिल किया गया है।

राजपूत (04): इस कैबिनेट में राजपूत समाज को सबसे ज्यादा तरजीह मिली है। भाजपा से संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह, जदयू से लेसी सिंह और लोजपा (रामविलास) से संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है।

अन्य सवर्ण (05): भूमिहार और ब्राह्मण समाज से भी कद्दावर चेहरों को जगह दी गई है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा (ब्राह्मण) जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं।

एक नजर में जातीय समीकरण:
कैबिनेट में समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है:

अति पिछड़ा (EBC): 09 मंत्री (सबसे बड़ा समूह)

सवर्ण (Forward Class): 09 मंत्री

दलित (SC): 07 मंत्री

ओबीसी (OBC): 07 मंत्री (यादव, वैश्य, कुशवाहा आदि)

मुस्लिम: 01 मंत्री (जमा खान)

तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों को मिली जगह
इस मंत्रिमंडल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की विरासत भी नजर आ रही है। जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन, जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा और नीतीश कुमार के पुत्र निशांत को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार ने अनुभव और विरासत का तालमेल बिठाया है।

आधी आबादी को सम्मान
सम्राट कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है। कुल 5 महिला मंत्रियों (लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता, शीला कुमारी, रमा निषाद और श्रेयसी सिंह) को शपथ दिलाई गई है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।