बिहार के गांवों में आने वाली है रोजगार की क्रांति! 20 लाख लोगों को मिलेगी नौकरी, जानें सरकार का मास्टर प्लान

अगर आप बिहार के गांव में रहते हैं या अपने ही इलाके में काम की तलाश कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। अब गांव के पैक्स (PACS) और व्यापार मंडल सिर्फ खाद-बीज बेचने या धान-गेहूं की खरीद तक सीमित नहीं रहेंगे। बिहार सरकार इन्हें बड़े बिजनेस हब के रूप में ढालने जा रही है, जिससे अगले 5 सालों में राज्य के 20 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
सहकारिता विभाग ने इसका पूरा खाका तैयार कर लिया है और जल्द ही इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने वाली है।

अब सिर्फ खेती नहीं, इन 6 नए सेक्टरों से होगी मोटी कमाई। राज्य के 8,463 पैक्स और 500 से अधिक व्यापार मंडलों को पूरी तरह से हाई-टेक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। अब ये संस्थाएं खेती के अलावा इन क्षेत्रों में भी काम करेंगी:

फूड प्रोसेसिंग: गांव के फल, अनाज और सब्जियों को प्रोसेस करके नया उत्पाद बनाना और बेचना।

डेयरी और मत्स्य पालन: दूध उत्पादन और मछली पालन का आधुनिक स्तर पर विस्तार।

ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा): सौर ऊर्जा जैसे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट्स से ग्रामीणों को जोड़ना।

आधुनिक गोदाम (वेयरहाउसिंग): फसलों को सुरक्षित रखने के लिए नए और बड़े स्टोरेज बनाना।

ग्रामीण पर्यटन: गांव की संस्कृति, खान-पान और खास पहचान को पर्यटन से जोड़ना।

बिजनेस शुरू करने के लिए मिलेगा आसान लोन

पैक्स और व्यापार मंडल में नया बिजनेस शुरू करने के लिए अब पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। ‘बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026’ के तहत बैंकों के माध्यम से आसान शर्तों पर लोन (ऋण) दिलाने का पक्का इंतजाम किया गया है। इससे गांव के युवाओं और किसानों को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलेगी।

हर पंचायत में बनेगा ‘कोऑपरेटिव विलेज’
सरकार की इस योजना का मूल मंत्र है—’गांव का विकास, गांव के लोगों के साथ’। इसके तहत राज्य की हर पंचायत में एक सक्रिय सहकारी इकाई खोली जाएगी और गांवों को ‘कोऑपरेटिव विलेज’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस कदम से सालों से सुस्त पड़ी सहकारी संस्थाओं में नई जान आएगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।