स्मार्ट सिटी के बाद अब ‘स्मार्ट’ होंगे बिहार के छोटे शहर; तीसरी आंख की जद में होगा राज्य का कोना-कोना

सावधान! अब बिहार के छोटे शहरों में भी नियम तोड़ना जेब पर भारी पड़ेगा। हेलमेट और सीट बेल्ट भूलने वालों के घर सीधे पहुंचेगा ‘स्मार्ट चालान’ साथ ही अपराधियों के लिए भी अब बचना मुश्किल होगा….जानिए बिहार पुलिस की इस अभेद्य घेराबंदी का पूरा प्लान।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में अपराध नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नीतीश सरकार ‘डिजिटल घेराबंदी’ की तैयारी में है। राजधानी पटना और चार प्रमुख स्मार्ट शहरों की तर्ज पर अब राज्य के सभी जिला मुख्यालयों और छोटे शहरों में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय की इस पहल से न केवल संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि ट्रैफिक नियमों को तोड़ना भी अब जेब पर भारी पड़ेगा।

27 जिलों में सर्वे शुरू: सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट
एडीजी (आधुनिकीकरण एवं यातायात) सुधांशु कुमार के अनुसार, बिहार के शेष 27 जिलों में कैमरे लगाने के लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘सुरक्षित शहर’ (Safe City) मॉडल को पूरे राज्य में लागू करना है।

प्रमुख चौक-चौराहों पर नजर: सर्वे के बाद महत्वपूर्ण सड़कों और चौराहों को चिन्हित कर वहां हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए जाएंगे।

एएनपीआर (ANPR) तकनीक: पटना की तरह अन्य शहरों में भी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगेंगे, जो नियम तोड़ते ही सीधे वाहन मालिक के घर चालान भेज देंगे।

पटना के आसपास 22 नए लोकेशन पर लगेंगे
राजधानी पटना के शहरी क्षेत्र की सफलता के बाद, अब दानापुर, बाईपास और जीरो माइल जैसे इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में पटना नगर निगम क्षेत्र के 30 पॉइंट पर पहले से ही स्मार्ट कैमरे काम कर रहे हैं, जिससे जाम और अपराध दोनों पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है।

सचिवालयों की सुरक्षा: अब अभेद्य होंगे सरकारी गलियारे
केवल सड़कें ही नहीं, बल्कि राज्य के महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र यानी सचिवालयों की सुरक्षा भी अपग्रेड की जा रही है।

निगरानी केंद्र (Viewing Centers): विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, पुराना सचिवालय और सिंचाई भवन जैसे प्रमुख केंद्रों में अलग से कंट्रोल रूम और व्यूइंग सेंटर बनाए जा रहे हैं। इसका जिम्मा बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (BELTRON) को सौंपा गया है।

क्या कैमरों से बदलेगी बिहार की तस्वीर?
यह कदम बिहार पुलिस के ‘डिजिटल आधुनिकीकरण’ की दिशा में एक बड़ी छलांग है। हालांकि, कैमरों की भारी तादाद से निजता (Privacy) और डेटा सुरक्षा जैसे सवाल उठ सकते हैं, लेकिन अपराध की गुत्थी सुलझाने और ट्रैफिक अनुशासन पैदा करने में यह ‘तीसरी आंख’ गेम-चेंजर साबित होगी। छोटे शहरों में कैमरों का आना वहां की पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।