बिहार में अब ‘जीरो FIR’ पर नहीं चलेगा थानों का बहाना: अब आम जनता को मिला सुपरपॉवर

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में अब अपराध की सूचना देने पर थानेदार अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे। बिहार पुलिस मुख्यालय ने ‘जीरो एफआईआर’ को लेकर एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। नए कानून BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 173 के तहत अब किसी भी थाने में अपराध की सूचना दी जा सकती है, जिसे दर्ज करना अनिवार्य होगा। अब थानेदार ये नहीं कह पाएगा कि,’यह मामला मेरे इलाके का नहीं है!’ बिहार पुलिस का नया नियम अब आम जनता को सुपरपावर देने जा रहा है।

नए नियमों की मुख्य बातें:
कहीं भी दर्ज कराएं शिकायत: अपराध चाहे किसी भी क्षेत्र में हुआ हो, पीड़ित किसी भी नजदीकी थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है।

डिजिटल और मौखिक सुविधा: शिकायतकर्ता मौखिक रूप से या डिजिटल माध्यम से सूचना दे सकता है। मौखिक सूचना को लिखकर पीड़ित को पढ़कर सुनाया जाएगा और उनके हस्ताक्षर लिए जाएंगे।

निशुल्क कॉपी: धारा 173(2) के तहत सूचना देने वाले व्यक्ति को एफआईआर की एक कॉपी तुरंत और मुफ्त में दी जाएगी।

दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा: यदि कोई व्यक्ति मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग है, तो पुलिस अधिकारी उनके निवास स्थान पर जाकर, विशेष शिक्षक की उपस्थिति में शिकायत दर्ज करेंगे।

निगरानी के लिए ‘स्पेशल रजिस्टर’
पुलिस मुख्यालय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए थानों से लेकर जिला कार्यालयों तक ‘जीरो एफआईआर रजिस्टर’ मेंटेन करने का आदेश दिया है। इसकी हर हफ्ते अंचल निरीक्षक और हर पखवाड़े (15 दिन) एसडीपीओ द्वारा जांच की जाएगी। साथ ही, CCTNS के माध्यम से संबंधित जिले को यह प्राथमिक सूचना तुरंत स्थानांतरित कर दी जाएगी।

क्या है जीरो एफआईआर?
जब किसी थाने में ऐसे अपराध की सूचना दी जाती है जो उसके भौगोलिक अधिकार क्षेत्र से बाहर हुआ हो, तो उसे ‘जीरो एफआईआर’ के रूप में दर्ज किया जाता है। इसका उद्देश्य पीड़ित को बिना देरी न्याय दिलाना है।