न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार सरकार राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब किडनी के मरीजों को डायलिसिस के लिए जिला अस्पतालों या राजधानी पटना के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य के सभी 56 अनुमंडल अस्पतालों में अगले तीन महीने के भीतर डायलिसिस की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
एजेंसियों के साथ करार और जगह का चयन पूरा
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय के अनुसार, सभी 56 अनुमंडल अस्पतालों के परिसर में जगह चिह्नित कर ली गई है। इसके लिए संबंधित कार्यदायी एजेंसियों के साथ एकरारनामा (Agreement) भी हो चुका है। कई अस्पतालों में सेंटर बनाने का काम अपने अंतिम चरण में है। इन केंद्रों पर न केवल आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, बल्कि विशेषज्ञ कर्मियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज मिल सके।
जिला अस्पतालों पर कम होगा बोझ
वर्तमान में बिहार के 35 जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। अनुमंडल स्तर पर ये केंद्र शुरू होने से जिला अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को उनके घर के नजदीक ही इलाज मिल सकेगा, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी। सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इन केंद्रों के निर्माण कार्य में तेजी लाएं।
प्रखंड स्तर पर पैथोलॉजी जांच होगी सुदृढ़
अस्पतालों में केवल डायलिसिस ही नहीं, बल्कि बीमारी की शुरुआती पहचान पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य के प्रखंड (Block) स्तर के सभी सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी सुविधाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। अब मरीजों को खून, पेशाब, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हीमोग्लोबिन जैसी अनिवार्य जांचों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए जरूरी उपकरण और लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
बिहार में किडनी रोग की स्थिति
बिहार की एक बड़ी आबादी किडनी की समस्याओं से जूझ रही है। सूबे में करीब 1.7 करोड़ लोग किडनी की किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। हर साल लगभग 20,000 नए मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। देश स्तर पर हर 15 में से एक व्यक्ति किडनी की खराबी से जूझ रहा है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों और पुरुषों की संख्या अधिक है।
































