न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार सरकार ने सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जनशिकायतों के निपटारे की पूरी व्यवस्था को ‘फुलप्रूफ’ बना दिया है। अक्सर देखा जाता था कि सरकारी दफ्तरों में शिकायतें धूल फांकती रहती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हर जनशिकायत पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही अब सीधे मुख्य सचिव (Chief Secretary) को देनी होगी।
बिहार सरकार का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ‘माइलस्टोन’ साबित हो सकता है। सीधे मुख्य सचिव कार्यालय से निगरानी होने का मतलब है कि अब आम आदमी की आवाज और सरकारी फाइलों की रफ्तार के बीच कोई बाधा नहीं रहेगी।
72 घंटे का ‘अल्टीमेटम’ और विशेष पोर्टल
नई कार्ययोजना के तहत, अब किसी भी शिकायत पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य होगा। इसकी निगरानी के लिए मुख्य सचिव कार्यालय में एक विशेष सेल और डेडिकेटेड पोर्टल बनाया गया है।
इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल शिकायत दर्ज करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हर विभाग के लिए ‘रिपोर्ट कार्ड’ की तरह काम करेगा।
संबंधित विभाग को यह बताना होगा कि :-
विभाग के पास शिकायत कब आई?
अब तक उस पर क्या कार्रवाई की गई?
यदि देरी हुई, तो उसका ठोस कारण क्या है?
जनता को क्या होगी सीधी सुविधा
इस नए सिस्टम से आम लोगों को कई बड़े फायदे होने जा रहे हैं :-
जवाबदेही तय: अब कोई भी अधिकारी यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि मामला “प्रक्रिया में” है। सीधे मुख्य सचिव की निगरानी होने से काम में तेजी आएगी।
शिकायत के बहुआयामी विकल्प: आम लोग अब निर्धारित अवधि में व्यक्तिगत रूप से मिलकर, सरकारी फोन नंबरों पर डायल करके या फिर व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए भी अपनी शिकायत सीधे मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचा सकेंगे।
सोमवार और शुक्रवार ‘जनता के नाम’: मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी विभागों को सोमवार और शुक्रवार का दिन विशेष रूप से आम लोगों की शिकायतों के लिए सुरक्षित रखने को कहा गया है।
जिला स्तर पर भी होगी कड़ी निगरानी
यह व्यवस्था केवल पटना तक सीमित नहीं है। जिलों में कार्यरत अधिकारियों को भी उसी गंभीरता से जनशिकायतों पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। अब जिलों से आने वाली रिपोर्ट की भी नियमित मॉनिटरिंग होगी, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए राजधानी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
































