न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की नदियों के अस्तित्व को बचाने और जल संरक्षण की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की 10 छोटी और मध्यम नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए जल संसाधन विभाग ने 626 करोड़ रुपये की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत इन नदियों के 567 किलोमीटर क्षेत्र में गाद (Silt) की उड़ाही की जाएगी, जिससे नदियों का प्रवाह सुगम होगा और भू-जल स्तर में सुधार आएगा।
गाद का संकट और नदियों का सिमटता अस्तित्व
बिहार की कई छोटी नदियां इस समय गाद की समस्या के कारण दम तोड़ रही हैं। समय के साथ नदियों के तल में मिट्टी और कचरा जमा होने से उनकी गहराई कम हो गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि मानसून के दौरान ये नदियां जलभराव का कारण बनती हैं, जबकि शेष साल में ये सूखकर खेल के मैदान या छोटे तालाबों में तब्दील हो जाती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान इन नदियों की बदहाली को करीब से देखा था, जिसके बाद इस कायाकल्प योजना की नींव रखी गई।
इन 10 नदियों का होगा पुनर्जीवन
योजना के तहत चयनित नदियों में मुख्य रूप से बाया, पुरानी कमलाधार, जीवछ, जीवछ कमला, पुरानी कमला, बलान, सुरसर, रमजान, तिलाबे और अधियारा शामिल हैं। ये नदियां मुख्य रूप से वैशाली, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, किशनगंज, सहरसा और नालंदा जैसे जिलों से होकर गुजरती हैं। सबसे लंबी उड़ाही ‘पुरानी कमलाधार’ (171 किमी) और ‘बाया’ नदी (114 किमी) में की जाएगी।
अतीत के प्रयास और वर्तमान की चुनौती
बिहार में पहले भी नदियों की उड़ाही (Dredging) के प्रयास हुए हैं, लेकिन वे अक्सर छिटपुट और स्थानीय स्तर तक सीमित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से गाद न निकालने के कारण नदियां फिर से भर जाती थीं। इस बार की योजना में ‘नेटवर्क आधारित’ एप्रोच अपनाई जा रही है, जहाँ पूरी नदी के प्रवाह क्षेत्र को कवर किया जा रहा है।
अतीत में कोसी और गंडक जैसी बड़ी नदियों की गाद नीति (Silt Policy) को लेकर भी बिहार सरकार केंद्र से मांग करती रही है। वर्तमान योजना छोटी नदियों पर केंद्रित है, जिससे न केवल सिंचाई में मदद मिलेगी बल्कि जल संचयन की क्षमता बढ़ने से बाढ़ के खतरे में भी कमी आएगी।
क्या होगा लाभ?
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, इस योजना के पूरे होने के बाद ये नदियां साल के अधिकांश समय अविरल बहेंगी। इससे न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में सुधार होगा, बल्कि आसपास के कृषि क्षेत्रों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। साथ ही, नदियों का तल गहरा होने से नीचे की ओर जल संचयन (Water Recharge) की क्षमता भी बढ़ेगी।
































