नीतीश की ‘फिल्डिंग’ या तेजस्वी का ‘दांव’? राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए शुरू हुआ शह-मात का खेल

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की सियासत में सोमवार का दिन एक बड़े शक्ति परीक्षण का गवाह बनने जा रहा है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव ने राज्य के राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। अमूमन निर्विरोध होने वाले इन चुनावों में इस बार पेंच फंस गया है, जिससे मुकाबला ‘3 बनाम 6’ के रोचक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। जहाँ सत्ताधारी एनडीए को अपनी पांचवीं सीट सुरक्षित करने के लिए महज 3 अतिरिक्त वोटों की दरकार है, वहीं महागठबंधन को अपने इकलौते उम्मीदवार की नैया पार लगाने के लिए 6 और विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

राजधानी पटना की सड़कों से लेकर बड़े नेताओं के सरकारी आवासों तक, रविवार का पूरा दिन रणनीतियों और ‘मॉक पोल्स’ के नाम रहा। एनडीए खेमे में किसी भी तरह की तकनीकी चूक की गुंजाइश न रहे, इसके लिए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर विधायकों को बाकायदा मतदान का प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की हालिया नजदीकियों के बीच एनडीए के रणनीतिकार यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि उनके विधायकों का एक-एक वोट सही तरीके से बैलेट बॉक्स में गिरे। भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों और जदयू के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि गठबंधन इस बार किसी भी तरह के ‘सरप्राइज’ के मूड में नहीं है।

दूसरी ओर, विपक्ष की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव ने भी अपनी पूरी ‘फिल्डिंग’ सेट कर दी है। आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और तेजस्वी ने महागठबंधन के सभी विधायकों को पटना में ही रहने के कड़े निर्देश दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि विपक्षी गठबंधन ने अपनी बैठक के स्थान को लेकर आखिरी वक्त तक सस्पेंस बनाए रखा, जो उनकी रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों रणनीतियों की ओर इशारा करता है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट के लिए 41 वोटों की जादुई संख्या तक पहुंचना महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनके पास वर्तमान में 35 विधायकों का ही ठोस आधार दिख रहा है।

सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि क्या नीतीश कुमार की राज्यसभा उम्मीदवारी और उनके बदले हुए हाव-भाव विपक्ष के खेमे में कोई बड़ी सेंधमारी कर पाएंगे? शनिवार को भाजपा कोर कमेटी की बैठक से लेकर उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुए भोज तक, एनडीए ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है। हालांकि, राजनीति में ‘अंतिम क्षण’ की अपनी अहमियत होती है और तेजस्वी यादव इसी उम्मीद में हैं कि कोई बड़ा उलटफेर उन्हें एक सीट दिला दे।

कल होने वाला मतदान केवल पांच चेहरों को दिल्ली भेजने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों गठबंधनों के आपसी तालमेल और ताकत का लिटमस टेस्ट भी साबित होगा।