डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की पुण्यतिथि पर भागलपुर में स्मृति सभा, अजीत शर्मा ने कहा-बिहार के विकास की नींव रखने वाले थे श्रीकृष्ण बाबू

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री एवं ‘बिहार केसरी’ के नाम से विख्यात डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर भागलपुर में एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय पूर्व विधायक अजीत शर्मा के निवास स्थित कांग्रेस के कैम्प कार्यालय में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का बिहार के विकास में योगदान अविस्मरणीय है। उनके कार्यकाल में बिहार विकास की गति में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल था।
श्री शर्मा ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन और छुआछूत के खिलाफ डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के संघर्ष ने दलितों और पिछड़े वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। देवघर मंदिर में दलितों को प्रवेश दिलाकर उन्होंने सामाजिक समरसता की दिशा में ऐतिहासिक पहल की, जिसने पूरे देश को नई दिशा दी।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में औद्योगिक और आधारभूत ढांचे का व्यापक विकास हुआ। बरौनी रिफाइनरी, बरौनी फर्टिलाइजर, सिंदरी एवं रांची में भारी उद्योग निगम की स्थापना, बोकारो स्टील प्लांट, मोकामा में गंगा पर राजेंद्र पुल का निर्माण, उत्तर बिहार में सिंचाई हेतु कोशी परियोजना तथा पूसा में कृषि महाविद्यालय की स्थापना उनके दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1962 में योजना आयोग ने बिहार को भारत का सबसे सुसज्जित राज्य घोषित किया था।
श्री शर्मा ने कहा कि आज सुशासन की बात करने वालों को डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल से सीख लेनी चाहिए। बिहार और देश की प्रगति में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधि डॉ. अभय आनंद, विपिन बिहारी यादव, नगर कांग्रेस अध्यक्ष सोइन अंसारी, डॉ. अभिषेक चौबे, इंटक अध्यक्ष रवि कुमार, मो. महताब खान, सैफ बिन मल्लिक, बंटी दास पान, मिनाक्षी रॉयल, ज्योति देवी, खुशबू देवी, बाबर अंसारी, जाहिर नेजामी, पार्षद प्रतिनिधि नंद गोपाल सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के विचारों को आत्मसात करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।