न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में अब जमीन की पैमाइश के लिए रैयतों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की है कि राज्य में 26 जनवरी से भूमि मापी का विशेष महाअभियान शुरू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत आवेदन से लेकर रिपोर्ट तक की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और ऑनलाइन कर दिया गया है।
7 से 11 दिनों में पूरी होगी मापी
नई कार्ययोजना के अनुसार, समय सीमा में भारी कटौती की गई है:
अविवादित जमीन: मापी की प्रक्रिया मात्र 7 दिनों में पूरी करनी होगी।
विवादित जमीन: ऐसी जमीनों के लिए अधिकतम 11 दिनों का समय तय किया गया है।
रिपोर्ट अपलोड: अमीन को मापी के बाद 14 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
पहले इस पूरी प्रक्रिया में औसतन 30 दिनों का समय लगता था।
ऑनलाइन आवेदन और शुल्क विवरण
अब जमीन मापी के लिए केवल ‘बिहार भूमि मापी पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए शुल्क भी निर्धारित कर दिया है:
ग्रामीण क्षेत्र: ₹500 प्रति खेसरा।
शहरी क्षेत्र: ₹1000 प्रति खेसरा।
तत्काल मापी (Tatkal): यदि कोई जल्द मापी चाहता है, तो उसे निर्धारित राशि से दोगुनी फीस देनी होगी।
पारदर्शिता और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस अभियान को सफल बनाने के लिए तकनीक और सुरक्षा का समन्वय किया गया है:
एसएमएस अलर्ट: आवेदन और मापी की तिथि की जानकारी आवेदक और संबंधित चौहद्दीदारों को एसएमएस (SMS) के जरिए दी जाएगी।
पुलिस बल की तैनाती: विवादित मामलों में मापी के दौरान अमीन और कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल साथ जाएगा।
जिम्मेदार अधिकारी: जिले के समाहर्ता (DM) इस पूरे अभियान के नियंत्रण पदाधिकारी होंगे। अभियान के लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की प्रतिनियुक्ति भी की जाएगी।

































