शिवानंद तिवारी ने दही-चूड़ा के बहाने तेजस्वी से किया तीखा सवाल, पूछा… मुंख्यमंत्री की शपथ की तारीख तय कराने वाले कहां गायब हैं?

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की राजनीति में ‘मकर संक्रांति’ का दही-चूड़ा भोज कभी शक्ति प्रदर्शन और मेल-मिलाप का जरिया हुआ करता था। लेकिन इस साल के आयोजन ने राजद के भीतर के अंतर्विरोधों को सड़क पर ला दिया है। राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी यादव की चुप्पी और मैदान से गायब रहने पर जो टिप्पणी की है, वह पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए किसी बड़े राजनीतिक संकेत से कम नहीं है।
शिवानंद तिवारी का बयान केवल एक तंज नहीं, बल्कि राजद के नेतृत्व के लिए एक ‘अलार्म’ है। यदि तेजस्वी यादव जल्द ही मैदान में सक्रिय नहीं होते, तो कार्यकर्ताओं का मोहभंग होना और तेज प्रताप जैसे ‘सक्रिय’ चेहरों के इर्द-गिर्द नई धुरी बनना तय है। पशुपति पारस का “नए समीकरण” वाला बयान इस ओर इशारा करता है कि मकर संक्रांति के बाद बिहार की राजनीति में कुछ बड़ा उलटफेर होने वाला है।

10 सर्कुलर रोड का सन्नाटा: क्या यह सत्ता केंद्र बदलने का संकेत है?
शिवानंद तिवारी ने बड़ी स्पष्टता से कहा कि 10 सर्कुलर रोड (राबड़ी आवास), जो कभी बिहार के कोने-कोने से आने वाले राजद कार्यकर्ताओं से गुलजार रहता था, आज वहाँ ‘सन्नाटा’ पसरा है। यह सन्नाटा सिर्फ एक घर की खामोशी नहीं है, बल्कि विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर व्याप्त निराशा का प्रतीक है। चुनाव नतीजों के बाद राजद के कार्यकर्ताओं को जिस भरोसे और दिलासे की जरूरत थी, उसकी कमी तिवारी के बयानों में साफ झलकती है।

तेजस्वी की अनुपस्थिति बनाम तेज प्रताप का ‘शक्ति प्रदर्शन’
शिवानंद तिवारी ने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि आज राजनीति के रंग में तेज प्रताप यादव सराबोर दिख रहे हैं, जबकि तेजस्वी यादव बिल्कुल ओझल हैं। हालिया घटनाक्रम इसकी पुष्टि करते हैं:
भोज की मेजबानी : जहां तेजस्वी यादव मैदान से गायब हैं, वहीं तेज प्रताप यादव ने भव्य दही-चूड़ा भोज आयोजित कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
विपक्षी मेल-मिलाप: तेज प्रताप के भोज में भाजपा के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और एनडीए के कई मंत्रियों का पहुंचना उनकी बढ़ती स्वीकार्यता या बदली हुई रणनीति की ओर इशारा करता है।
पिता का साथ: लालू प्रसाद यादव ने भी तेज प्रताप के आयोजन में शिरकत की, जिससे पारिवारिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

‘जयचंद’ और सलाहकारों की भूमिका पर सवाल
तिवारी ने उन लोगों पर भी निशाना साधा है जिन्होंने तेजस्वी को ‘मुख्यमंत्री’ बनाने की तारीखें तय कर दी थीं और तेज प्रताप को एक बड़ा ‘अवरोध’ मानकर किनारे कर दिया था। यह सीधा हमला तेजस्वी के उन रणनीतिकारों और सलाहकारों पर है, जो जमीनी हकीकत से दूर सिर्फ ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ में विश्वास रखते हैं। शिवानंद का सवाल.. “पता नहीं वे लोग कहां हैं”, कार्यकर्ताओं के उस गुस्से को स्वर देता है जो पार्टी की दुर्गति के लिए आंतरिक गुटबाजी को जिम्मेदार मानते हैं।

राजद के सामने भविष्य की चुनौती
बिहार चुनाव 2025 में राजद की सीटों की संख्या घटकर 25 रह गई है। ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष का सदन और मैदान दोनों से दूर रहना भाजपा-जदयू गठबंधन को वॉकओवर देने जैसा है। शिवानंद तिवारी की चिंता वाजिब है… जब नेता ही पस्त है, तो दल को कौन ऊर्जावान करेगा?