बिहार की सियासत में ‘दही-चूड़ा’ वाली गर्माहट: तेज प्रताप के भोज में साथ दिखे लालू-गवर्नर, रात में पटाखों से मना जश्न

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद का ‘दही-चूड़ा’ भोज सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि सियासी समीकरणों का खेल भी होता है। पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की ओर से आयोजित भोज ने इस बार न सिर्फ भीड़ जुटाई, बल्कि विरोधियों को भी एक मेज पर लाकर खड़ा कर दिया। आयोजन की सफलता से गदगद तेज प्रताप ने दिन में मेहमाननवाजी की और सूरज ढलते ही आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया।

एक मेज पर लालू, गवर्नर और एनडीए के दिग्गज
भोज की शुरुआत काफी प्रभावशाली रही। तेज प्रताप के निमंत्रण पर सबसे पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पहुंचे। इसके कुछ ही देर बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का काफिला भी पहुंचा। दिलचस्प नजारा तब दिखा जब लालू यादव और राज्यपाल एक साथ बैठकर दही-चूड़ा और तिलकुट का स्वाद लेते नजर आए। दोनों के बीच हुई लंबी अनौपचारिक बातचीत ने सबका ध्यान खींचा। यही नहीं, नीतीश सरकार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और मंत्री अशोक चौधरी की मौजूदगी ने इस आयोजन को ‘सर्वदलीय’ रंग दे दिया। काफी समय बाद तेज प्रताप के मामा साधु यादव भी अपने भांजे के बुलावे पर पहुंचे, जो परिवार और राजनीति दोनों लिहाज से चर्चा का विषय बना रहा।

पशुपति पारस की ‘भविष्यवाणी’ ने बढ़ाई हलचल
भोज में पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने एक ऐसा बयान दिया जिसने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। उन्होंने कहा, “आज से ग्रह बदल रहे हैं और राजनीति में एक नया समीकरण जन्म लेगा।” उनके इस रहस्यमयी बयान को बिहार की भावी राजनीति में होने वाले किसी बड़े उलटफेर के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हार की टीस और जीत का जश्न
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तेज प्रताप के लिए यह आयोजन एक बड़ी व्यक्तिगत और राजनीतिक चुनौती थी। उन्होंने खुद घर-घर जाकर सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं को न्योता दिया था। जब उनके आवास पर भारी भीड़ उमड़ी और दिग्गज नेता पहुंचे, तो तेज प्रताप की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

मेजबानी खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी ‘कोर टीम’ के साथ बैठकर आतिशबाजी का आनंद लिया। कुर्सी पर बैठकर आसमान में रंगीन पटाखों को निहारते हुए तेज प्रताप का आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। समर्थकों और मीडिया की भारी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी रहे हों, सियासी गलियारों में उनकी पकड़ आज भी बरकरार है।