न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में अपराध की एक बड़ी जड़ ‘जमीन विवाद’ को माना जाता है। थानों से लेकर कोर्ट तक भूमि विवाद के मामलों का अंबार लगा है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सीधा जनता से जुड़ने का फैसला किया है। विभाग ने एक टोल-फ्री नंबर और ऑनलाइन ‘जन शिकायत पोर्टल’ लॉन्च किया है, ताकि रैयतों को अब दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
बिहार में जमीन विवादों के कारण होने वाली हत्याओं का ग्राफ किसी से छिपा नहीं है। सरकार का यह कदम कागजों पर तो बहुत मजबूत दिखता है, लेकिन असली चुनौती ‘जवाबदेही’ (Accountability) तय करने की है। क्या टोल-फ्री नंबर पर आने वाली शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी? क्या पोर्टल पर दर्ज शिकायत का निपटारा उसी अधिकारी के पास तो नहीं भेज दिया जाएगा, जिसके खिलाफ शिकायत है?
विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में विभाग इसे पारदर्शी बनाने का दावा कर रहा है। यदि यह व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हुई, तो बिहार के गांवों में होने वाली खेतिहर हिंसा में भारी कमी आ सकती है।
नोट: यदि आप भी भूमि से संबंधित किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं, तो तुरंत सरकार द्वारा जारी इन आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करें और रसीद या शिकायत संख्या संभाल कर रखें।
अब बिचौलियों की खैर नहीं: घर बैठे होगा समाधान
अक्सर देखा जाता है कि अंचल कार्यालयों (CO Office) में दाखिल-खारिज (Mutation) या जमीन की मापी के लिए लोगों को महीनों तक दौड़ाया जाता है। इसी ‘लाल फीताशाही’ को तोड़ने के लिए विभाग ने 1800-345-6215 टोल-फ्री नंबर जारी किया है।
शिकायत दर्ज करने के दो मुख्य माध्यम:
टोल-फ्री नंबर: 1800-345-6215 (कार्यकाल के दौरान कॉल करें)।
ऑनलाइन पोर्टल: biharbhumiplus.bihar.gov.in/pg/ पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें और उसका स्टेटस ट्रैक करें।
1 जनवरी 2026 से बदल जाएगा पूरा सिस्टम
जैसा कि विदित है, बिहार सरकार ने 1 जनवरी 2026 से सभी राजस्व अभिलेखों की सत्यापित नकल (Certified Copy) केवल ऑनलाइन देने का निर्णय लिया है। इस डिजिटल क्रांति के बीच, यह हेल्पलाइन नंबर जनता के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। अगर कोई कर्मचारी ऑनलाइन काम के बदले पैसे की मांग करता है या काम में देरी करता है, तो सीधे मुख्यालय में शिकायत की जा सकेगी।
इन समस्याओं का होगा निपटारा:
दाखिल-खारिज (Mutation) में होने वाली अनावश्यक देरी।
जमीन की मापी (Measurement) से जुड़ी शिकायतें।
कर्मचारी या अंचल अधिकारियों द्वारा की जा रही मनमानी।
जमीन के कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड में त्रुटि का सुधार।

































