दो दशक से बदहाल 7 किमी सड़क, युवाओं ने 7 साल सिस्टम से लड़ी लड़ाई; सड़क हुई मुक्त, निर्माण आख़िरी मुकाम पर

प्रदीप विद्रोही, भागलपुर

कोढ़ में खाज बन चुकी सड़क को मुक्ति दिलाकर कुछ युवाओं के हौसलों ने 20 वर्षों से जर्जर करीब सात किलोमीटर लंबी पीसीसी और अलकतरा सड़क को आज इसके मुकाम तक पहुंचा दिया है। लगभग 20 साल पहले एनटीपीसी द्वारा बनाई गई यह सड़क समय के साथ इतनी खराब हो चुकी थी कि किसी भी मौसम में उस पर चलना चुनौती से कम नहीं रहा। बरसात में कीचड़, गर्मियों में उड़ती धूल और जगह-जगह नाले जैसे गड्ढों ने इसे ‘सड़क’ से अधिक एक ‘यातना पथ’ में बदल दिया था। लगभग सात वर्षों के संघर्ष के बाद यह मार्ग अब लगभग पूर्ण निर्माण की स्थिति में पहुंच चुका है। कुलमिलाकर, दो दशक से बदहाल 7 किमी सड़क, युवाओं ने 7 साल सिस्टम से लड़ी लड़ाई; सड़क हुई मुक्त, निर्माण आख़िरी मुकाम पर है।

हजारों लोगों की जीवनरेखा, फिर भी दो दशक तक उपेक्षित

कहलगांव एनटीपीसी क्षेत्र से सटे खरवा टोला, शोभनाथपुर, भगलपुरा समेत कई गांवों को जोड़ने वाली वह मुख्य सड़क जो एनटीपीसी गेट संख्या-1 से चारदीवारी के किनारे एमजीआर रेल लाइन तक जाती है और वहीं से खरवा टोला होकर गेट संख्या-4 होते हुए भगलपुरा तक बढ़ती है। लगातार दो दशकों से जर्जरता की पराकाष्ठा झेल रही थी। इस मार्ग का उपयोग प्रतिदिन बंशीपुर एवं लगमा पंचायत के गांवों खरवा टोला, शोभनाथपुर, भगलपुरा, पाल टोला, बंशीपुर, गोपालपुर, ब्रह्मचारी, लगमा, लक्ष्मीपुर, बभनिया आदि के हजारों लोग करते हैं। हजारों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से स्कूल और कॉलेज जाते हैं। एनटीपीसी के 5,000 से अधिक संविदा कर्मियों व मजदूरों का भी यही मुख्य मार्ग है। साथ ही यह सड़क कहलगांव बाजार और रेलवे स्टेशन जाने का भी प्रमुख रास्ता है। इसके बावजूद सड़क का कायाकल्प इसलिए नहीं हो सका क्योंकि मामला एनटीपीसी और बिहार सरकार के बीच क्षेत्राधिकार विवाद में उलझा हुआ था।

क्षेत्राधिकार की उलझन और वर्षों की लापरवाही

चूंकि इस सड़क का निर्माण पहले एनटीपीसी ने कराया था, इसलिए इसका रखरखाव भी एनटीपीसी की जिम्मेदारी में आता था। लेकिन वर्षों से एनटीपीसी ने इसकी कोई सुध नहीं ली और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में ठोस प्रयास किए। नतीजा लोग परेशान, सड़क बदहाल और समस्या जस की तस।

जब युवा बने आवाज: सोशल मीडिया से आरटीआई तक की लड़ाई

बीते 7 – 8 वर्षों में शोभनाथपुर के जागरूक युवाओं गौरव सिंह, सुमिता सिंह, अभिषेक सिंह, युवराज सिंह, बाबुल सिंह और अन्य ने सोशल मीडिया पर लगातार फोटो-वीडियो पोस्ट कर इस सड़क की दुर्दशा को मुद्दा बनाया। स्थानीय अखबार भी अक्सर एनटीपीसी का विज्ञापन बंद होने के डर से इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे रहे। इसके बावजूद युवाओं के समूह ने एनटीपीसी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बिहार सरकार के अधिकारियों सभी के सामने अपनी मांगें रखीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मीटिंग, आग्रह और सड़क को क्षेत्राधिकार से मुक्त कराने की पहल

गौरव सिंह द्वारा दर्ज की जा रही लगातार आरटीआई और लिखित शिकायतों के बाद एनटीपीसी अधिकारियों ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया। इस बैठक में गौरव के साथ लगमा पंचायत के दिवंगत मुखिया स्व. संतोष यादव ने भी सड़क निर्माण के लिए जोरदार आग्रह रखा। बैठक में एक अहम मांग रखी गई – यदि एनटीपीसी सड़क का पुनर्निर्माण नहीं कर सकता, तो इसे अपने क्षेत्राधिकार से मुक्त कर दिया जाए, ताकि बिहार सरकार इसके निर्माण की जिम्मेदारी ले सके।

धीमी कार्रवाई, पर संघर्ष जारी

कई प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया वर्षों तक धीमी गति से चलती रही। आखिरकार 24 अगस्त 2024 को एक बार फिर ऑनलाइन पोर्टल और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को शिकायत भेजी गई, जिसकी औपचारिक कार्रवाई 27 अगस्त से शुरू हुई।साथ ही लोक शिकायत निवारण विभाग में भी आवेदन दिया गया।

लोक शिकायत की सुनवाई में खुला सच

सुनवाई के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों को लोक शिकायत पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। उन्होंने अपने जवाब में स्पष्ट कहा – ‘इन सड़कों का निर्माण एवं रखरखाव एनटीपीसी कहलगांव द्वारा किया जाना है।’ अर्थात, सड़क के सुधार में देरी की मुख्य वजह क्षेत्राधिकार का यही विवाद था।

अंततः सड़क मुक्त हुई, निर्माण अंतिम चरण में

इन सड़कों के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल भागलपुर के अधीक्षण अभियंता द्वारा 27 जनवरी 2025 को डीपीआर तैयार कर पटना कार्यालय भेजा गया। इसके बाद विभागीय प्रक्रियाओं के तहत जून 2025 में टेंडर जारी हुआ। 7 अगस्त 2025 को ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल कहलगांव के अभियंताओं ने शिकायतकर्ता गौरव सिंह की उपस्थिति में इन सड़कों का स्थल निरीक्षण व नापी की। निर्माण कार्य अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ और अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लंबे इंतजार के बाद अंततः इस कोढ़ बन चुकी सड़क से यहां की जनता को मुक्ति मिली है। उम्मीद है कि अगले दो सप्ताह में सड़क के सभी हिस्सों का निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।