न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना/भागलपुर
शनिवार को पटना स्थित कर्पूरी सभागार में एनडीए की जीत के उपलक्ष्य में आयोजित जदयू के सम्मान समारोह में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक उमेश सिंह कुशवाहा ने पूरे प्रदेश से आए नेताओं व कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया।
लेकिन जदयू भागलपुर जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह को कार्यक्रम में न तो बुलाया गया और न ही वे वहां नजर आए। समारोह से महानगर अध्यक्ष संजय शाह भी नहीं गए थे।
इसके उलट, हाल ही में बनाए गए भागलपुर (ग्रामीण) कार्यकारी जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता को बाकायदा आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। यह घटनाक्रम पार्टी की स्थानीय राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

लगातार उठते सवालों के बाद ‘एक्शन मोड’ में संगठन
जानकारी के मुताबिक, जदयू नेतृत्व जिले में संगठन की निष्क्रियता से नाराज था। जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह की कार्यशैली को लेकर कई नेताओं ने सवाल उठाए थे। जदयू नेता राकेश कुमार ओझा ने तो सोशल मीडिया के माध्यम से खुले तौर पर विपिन सिंह की निष्क्रियता पर निशाना साधा था।
इसके बाद बीते 29 अक्टूबर को जदयू ने अचानक बड़ा बदलाव करते हुए विवेकानंद गुप्ता को कार्यकारी जिलाध्यक्ष के पद पर मनोनित कर दिया। पार्टी के प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी चंदन कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र में इसे चुनावी सक्रियता बढ़ाने के लिए जरूरी कदम बताया गया था।
हालांकि कागज़ों में विपिन बिहारी सिंह जिलाध्यक्ष बने हुए हैं, लेकिन शनिवार के सम्मान समारोह में उनकी अनुपस्थिति ने साफ कर दिया कि जिले में वास्तविक नेतृत्व अब विवेकानंद के हाथों में जाता दिख रहा है।
संगठन की मजबूती को उठाया गया है कदम
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह कदम संगठन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि जमीन पर संगठन सक्रिय रहे। हालांकि, जिस तरीके से जिलाध्यक्ष को कार्यक्रम से ‘आउट’ किया गया, उससे यह साफ है कि जदयू भागलपुर यूनिट में अंदरूनी तनाव और बढ़ सकता है।
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ सम्मान समारोह से ‘निमंत्रण न देने’ भर की बात नहीं, बल्कि एक संगठनात्मक “मैसेज” है- जदयू नेतृत्व अब ढीली सक्रियता नहीं, फील्ड में दिखने वाला काम चाहता है।


































