सांसद अजय मंडल ने संसद में उठाया बुज़ुर्गों में बढ़ते डिमेंशिया का मुद्दा, केंद्र ने बताए योजनाएं

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर

भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने शुक्रवार को लोकसभा में प्रश्न संख्या 1036 के माध्यम से देश में तेजी से बढ़ रहे डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के मामलों को लेकर गंभीर सवाल उठाया। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने विस्तृत लिखित जवाब देते हुए सरकार की मौजूदा तैयारियों और योजनाओं का ब्यौरा दिया।

सरकार ने स्वीकार की चुनौती

मंत्री ने माना कि बुज़ुर्गों में डिमेंशिया तेजी से उभरती स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। इसे औपचारिक रूप से वृद्धावस्था, गैर-संचारी रोग (NCD) और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल किया गया है।

डायबिटीज–हाई BP नियंत्रण को बताया प्रमुख उपाय

सरकार ने बताया कि NPCDCS कार्यक्रम के तहत मधुमेह व उच्च रक्तचाप की नियमित जांच और प्रबंधन पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में डिमेंशिया का जोखिम कम हो सकता है।

आयुष्मान भारत – HWC में अनिवार्य स्क्रीनिंग

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में अब डिमेंशिया से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान को सेवा पैकेज का हिस्सा बनाया गया है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष चिकित्सा ढांचा

NPHCE के तहत मेडिकल कॉलेजों में 30-बिस्तर वाले जेरियाट्रिक वार्ड, जिला अस्पतालों में 10-बिस्तर की इकाइयां, CHC – PHC स्तर पर जेरियाट्रिक क्लिनिक, पुनर्वास सेवाएं, तथा बिस्तर पर पड़े बुज़ुर्गों के लिए होम-केयर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

देश के 767 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं

DMHP के दायरे में अब मानसिक विकारों से लेकर डिमेंशिया तक की पहचान और इलाज की सुविधा दी जा रही है।.डिमेंशिया/अल्ज़ाइमर मरीजों के care homes को 100% सहायता। सरकार ने बताया कि कम से कम 20 बुज़ुर्गों वाले नियमित देखभाल गृह और डिमेंशिया/अल्ज़ाइमर के गंभीर रोगियों के लिए विशेष गृहों को पूर्ण आर्थिक सहायता दी जाती है।

1.81 लाख ‘आरोग्य मंदिर’ अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से लैस

देशभर के उप-स्वास्थ्य केंद्र व PHC अपग्रेड होकर अब ऐसे केंद्र बन गए हैं जहां मानसिक, तंत्रिका और नशा संबंधी बीमारियों (डिमेंशिया समेत) का प्रबंधन किया जाता है।

Tele-MANAS बना मानसिक स्वास्थ्य का राष्ट्रीय मंच

36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 53 सेल सक्रिय हैं और अब तक 29.82 लाख से अधिक कॉलों का समाधान किया जा चुका है। मोबाइल ऐप और वीडियो काउंसलिंग की सुविधा भी शुरू हो चुकी है।

सांसद मंडल ने सरकार के जवाब को ‘जनता के लिए अत्यंत उपयोगी’ बताते हुए कहा कि ‘डिमेंशिया को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानकर सरकार द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं। हमारी मांग है कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में और तेज़ी से हो।’ उन्होंने समाज और परिवारों से भी अपील की कि वे जागरूकता, रोकथाम और देखभाल प्रशिक्षण पर ध्यान दें, ताकि डिमेंशिया से जूझ रहे बुज़ुर्गों को संवेदनशील व बेहतर समर्थन मिल सके।