- बिहार की 10 बाजार समितियों का आधुनिकीकरण अटका, विभागीय गड़बड़ियों ने 380 करोड़ की योजना को किया बर्बाद
- बिना सर्वे, बिना निरीक्षण, बस कागज़ी रिपोर्ट! पुल निगम की लापरवाही से ठप पड़ी करोड़ों की कृषि परियोजना
मदन, भागलपुर
राज्य के कृषि बाजार ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में दो वर्ष पहले शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना अब तक फाइलों के बोझ तले दबी हुई है। बिहार सरकार ने NABARD की RIDF योजना के तहत बक्सर, मधेपुरा, मधुबनी, भागलपुर, सुपौल, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, दलसिंहसराय और पटना सिटी—इन 10 बाजार समिति परिसरों के आधुनिकीकरण के लिए करीब 379 करोड़ रुपये की योजना तैयार की थी।
इसके लिए जून 2023 में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) को विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने का निर्देश दिया गया था। निगम ने सितंबर 2023 में डीपीआर बनाकर कृषि विपणन निदेशालय को सौंप भी दिया। डीपीआर बनाने में किस तरह की लापरवाही की गई, इसका खुलासा RTI एक्टिविस्ट अजीत कुमार सिंह द्वारा मांगी सूचना के आधार पर हुआ है।
डीपीआर में गंभीर खामियां, दोबारा तैयार करने का आदेश
विभागीय जांच में सभी 10 डीपीआर में गंभीर त्रुटियाँ सामने आईं। कृषि विभाग का कहना है कि स्थल निरीक्षण किए बिना डीपीआर तैयार कर दी गई
रिपोर्ट पुरानी संरचना व पुराने मॉडल पर आधारित थी
स्थानीय जरूरतों, यातायात, व्यापारिक गतिविधियों और भूमि की उपलब्धता का आकलन नहीं किया गया
कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ डीपीआर में शामिल ही नहीं थीं।

इन कमियों के आधार पर कृषि विपणन निदेशालय ने डीपीआर को स्वीकृत योग्य नहीं माना और BRPNNL को संशोधित डीपीआर दोबारा भेजने का निर्देश दिया। कृषि विभाग की टीम ने स्थल निरीक्षण के बाद आवश्यक सुधार बताए और निगम ने आंशिक संशोधन कर दोबारा डीपीआर भेज भी दी। इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। करीब ढाई वर्षों से यह प्रोजेक्ट फाइलों में ही घूम रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में कार्य शुरू होने की संभावना बेहद कम है।
भागलपुर बाजार समिति का मामला सबसे गंभीर
भागलपुर बाजार समिति के लिए लगभग ₹38.87 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। इस फेज-1 में 24 प्रमुख कार्य शामिल हैं, जिन पर तत्काल कार्य शुरू किया जा सकता था।


प्रमुख प्रस्तावित कार्य
मुख्य प्रवेश द्वार — ₹3.45 करोड़
बाउंड्री वॉल — ₹3.06 करोड़
5 मीटर एवं 15 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण — ₹5.51 करोड़
प्रशासनिक भवन — ₹7.76 करोड़
ट्रक ले-बे एवं पार्किंग — ₹3.30 करोड़
स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (1,676 मीटर) — ₹3.30 करोड़
सॉलिड वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम — ₹6.19 करोड़
वेंडिंग प्लेटफॉर्म, रिटेल शॉप, वेयरहाउस, लाइवस्टॉक शॉप—कुल ₹10 करोड़ से अधिक
रेन वाटर हार्वेस्टिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, CCTV, कैंपस डेवलपमेंट—लगभग ₹3.5 करोड़
निर्माण कार्य, प्राइस एस्केलेशन और अन्य विभागीय प्रावधानों को मिलाकर कुल लागत ₹38,87,93,000 निर्धारित की गई है।

फिर भी कार्य क्यों नहीं शुरू?
प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने के कारण भागलपुर सहित सभी बाजार समितियों में विकास कार्य ठप हैं। BRPNNL के प्रोजेक्ट इंजीनियर एस.के. शाह ने कहा-संशोधित डीपीआर विभाग को भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सवालों के घेरे में विभागीय लापरवाही
21 मई 2025 को कृषि सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ कि शुरुआती सभी डीपीआर बिना सर्वेक्षण, बिना तकनीकी मूल्यांकन,
बिना भूमि सत्यापन और बिना स्थानीय जरूरतों के आकलन के आधार पर तैयार कर विभाग को भेज दी गई थीं। इसके बाद कृषि विभाग ने सभी 10 डीपीआर की पुनर्समीक्षा का आदेश जारी किया और स्पष्ट कहा कि गलत डीपीआर पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी।

किसानों और कारोबारियों के हितों पर बड़ा असर
बाजार समितियों के आधुनिकीकरण से ग्रामीण व शहरी कृषि व्यापार को नई संरचना मिलती। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बेहतर मूल्य मिलता
भंडारण, परिवहन, वेस्ट मैनेजमेंट और डिजिटल सुविधाएँ मजबूत होतीं। राज्य के कृषि बाजारों में बड़े स्तर पर सुधार संभव था। लेकिन निरंतर टालमटोल और प्रशासनिक देरी के कारण योजना अधर में लटकी है।
380 करोड़ की योजना का भविष्य धुंधला
दो वर्षों से चल रही डीपीआर की प्रक्रियागत खामियों और बार-बार सामने आ रही लापरवाही ने पूरे प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया है। कृषि विपणन निदेशालय अब कब तक काम शुरू करेगा? इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं। राज्य के 10 बाजार समिति परिसरों के विकास को लेकर किसान और व्यापारी लगातार इंतजार कर रहे हैं कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना आखिर जमीन पर कब उतरेगी।


































