न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (Mahagathbandhan) की अप्रत्याशित हार के बाद किए गए विश्लेषणों से स्पष्ट होता है कि इसका मुख्य कारण उनके द्वारा बिछाया गया जातिगत समीकरण (Caste Math) का जाल ही था, जो बुरी तरह से उल्टा पड़ गया। विश्लेषण के केंद्र में राजद की EBC पर फोकस की विफलता और कांग्रेस की उच्च जातियों पर अत्यधिक निर्भरता रही। महागठबंधन का जातिगत समीकरण, जो EBC और उच्च जातियों के मिश्रण पर आधारित था, दोनों ही ध्रुवों पर टूट गया। राजद EBC को अपनी ओर नहीं खींच पाया और कांग्रेस उच्च जातियों को भाजपा से दूर नहीं कर पाई। इस दोहरी विफलता ने NDA की जीत का रास्ता साफ कर दिया।
राजद ने अपनी पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) आधार से आगे बढ़कर, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBCs) को साधने का प्रयास किया। यह वर्ग बिहार की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और नीतीश कुमार (NDA) का गढ़ माना जाता है। राजद ने EBC समुदाय से कई उम्मीदवारों को टिकट दिए, लेकिन इनमें से लगभग दो को छोड़कर अन्य सभी को हार का सामना करना पड़ा। समीक्षकों का मानना है कि EBC समुदाय में राजद के ‘यादव वर्चस्व’ की वापसी का डर अभी भी गहरा है, जिसने उन्हें नीतीश कुमार के ‘विकास और सुशासन’ की ओर धकेला। मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP) जैसी पार्टियों के बावजूद, जो मल्लाह (निषाद) जैसे EBC उप-समूहों को साधने में लगी थीं, महागठबंधन EBC वोटों में सेंध नहीं लगा पाया। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस ने अपनी 61 सीटों में से लगभग 36% टिकट उच्च जाति (Upper Castes) के उम्मीदवारों को दिए, जिनमें राजपूत, भूमिहार और ब्राह्मण शामिल थे। कांग्रेस के 22 उच्च जाति के उम्मीदवारों में से एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया।
यह जगजाहिर है कि बिहार में उच्च जातियाँ पारंपरिक रूप से भाजपा (BJP) की ओर झुकाव रखती हैं। कांग्रेस द्वारा इस समुदाय पर अत्यधिक निर्भरता दिखाना एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुई। इन उम्मीदवारों ने न केवल सीटें गंवाईं, बल्कि उनकी हार का औसत अंतर भी सबसे अधिक था, जो साफ दर्शाता है कि कांग्रेस को इस दांव से कोई लाभ नहीं मिला।
महागठबंधन की हार का डिकोड : राजद का EBC कार्ड और कांग्रेस का सवर्ण दांव क्यों हुआ फेल?

































