‘अभिमन्यु हूं, सबको जमीन में गाड़ दूंगा’ – NEET छात्रा की मौत पर अस्पताल के CMD डॉ. सतीश का बेशर्म बयान, पप्पू यादव ने कहा- ‘तुम डॉक्टर नहीं जल्लाद हो!’

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना

क्या सफेद कोट के पीछे छिपा अहंकार अब न्याय की आवाज को दफन करने की धमकी दे रहा है? पटना के प्रभात मेमोरियल अस्पताल के सीएमडी डॉ. सतीश सिंह ने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर बेशर्मी से जो ‘गर्जना’ की है, उसने न केवल संवेदनशीलता की सीमाएं लांघ दी हैं, बल्कि एक मृत छात्रा के परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

जहानाबाद की उस बेटी की मौत का हिसाब अभी बाकी है, जिसकी सांसें इसी अस्पताल के चारदीवारी के भीतर थम गईं। लेकिन इंसाफ पर बात करने के बजाय, डॉ. सतीश सिंह अब ‘कलयुग का अभिमन्यु’ बनकर विरोधियों को ‘जमीन में दफनाने’ की बात कर रहे हैं।

डॉक्टर या मौत का सौदागर? जमीन में गाड़ने की धमकी!

गणतंत्र दिवस पर जहां संविधान और गरिमा की बात होती है, वहां डॉ. सतीश सिंह ने अपने स्टाफ को संबोधित करते हुए सरेआम चुनौती दी। उन्होंने कहा:

जिसको जितना जोर लगाना है, जितनी साजिशें रचनी हैं, रच ले। अभिमन्यु हूं कलयुग का… एक-एक का दरवाजा खोलूंगा और एक-एक को जमीन में दफना कर नेस्तनाबूद कर दूंगा।”

सवाल यह उठता है: क्या एक डॉक्टर की भाषा ऐसी होनी चाहिए? क्या एक छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद आरोपी के घेरे में खड़ा शख्स इस तरह की ‘बाहुबली’ भाषा का इस्तेमाल कर सकता है? क्या यह डर है या रसूख का नंगा नाच?

पप्पू यादव का तीखा पलटवार: बेशर्म, तुम जल्लाद हो

इस पूरे मामले में सांसद पप्पू यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। डॉक्टर के इस अहंकार पर पलटवार करते हुए उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि बिहार को तय करना होगा कि यह शख्स डॉक्टर है या कुछ और। पप्पू यादव ने दहाड़ते हुए कहा— तय करे बिहार, ये डॉक्टर है या…? कलियुग के दुशासन का चीरहरण होकर रहेगा। बेशर्म तुम डॉक्टर नहीं जल्लाद हो। एक बेटी की अस्मत लुटेरों के कुकर्म को संरक्षण देने के साझीदार हो।”

न्याय की फाइल पर धूल, अस्पताल पर रसूख का पहरा?

नीट छात्रा की मौत के बाद अस्पताल पर लापरवाही और सबूत नष्ट करने के गंभीर आरोप लगे। प्रदर्शन हुए, गिरफ्तारी की मांग उठी, लेकिन पुलिस की जांच अब तक ‘कछुआ चाल’ से चल रही है। डॉ. सतीश सिंह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने नियमों का पालन किया है, लेकिन चार दिनों तक छात्रा को अस्पताल में रखकर आखिर क्या ‘खिचड़ी’ पकाई गई, इसका जवाब आज भी लापता है।

संविधान की दुहाई देने वाला ये डॉक्टर शायद भूल गया कि लोकतंत्र में ‘अभिमन्यु’ चक्रव्यूह तोड़ते हैं, लेकिन जनता का ‘न्याय’ अहंकार के किलों को ढहा देता है। इस बयान के बाद पटना की सियासत और जनता के बीच उबाल तय है।