गंभीर यौन अपराधियों के लिए हो केमिकल कास्ट्रेशन पर विमर्श हो, बने नेशनल सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्ट्री : शिक्षाविद राजेश चंद्र मिश्रा

जमुई की घटना चिंताजनक है। महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पूर्णिया में विद्या विहार रेसिडेंशियल स्कूल के सचिव और प्रख्यात शिक्षाविद राजेश चंद्र मिश्रा ने एक सख्त कानूनी ढांचे की वकालत की है। उन्होंने गंभीर यौन अपराधों में दोषियों के लिए केमिकल कास्ट्रेशन पर राष्ट्रीय विमर्श और आजीवन ‘नेशनल सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्ट्री’ (National Sex Offenders Registry) बनाने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, ताकि समाज और विशेषकर बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहसों के बीच प्रख्यात शिक्षाविद राजेश चंद्र मिश्रा ने अपने एक हालिया फेसबुक पोस्ट के जरिए न्याय और सुरक्षा के संतुलन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यौन अपराधों के मामलों में त्वरित जाँच, स्पीडी ट्रायल और कठोर दंड की मांग की है।

सुधार का अवसर हो, लेकिन समाज की सुरक्षा की कीमत पर नहीं
अपने पोस्ट में श्री मिश्रा ने अपराधियों के सुधार और समाज की सुरक्षा के बीच के द्वंद्व को रेखांकित करते हुए लिखा, “यूँ तो मैं इस सिद्धांत को मानता हूँ कि ‘Every saint has a past, and every sinner has a future.’ (हर संत का एक अतीत होता है, और हर पापी का एक भविष्य)। मनुष्य को सुधार का अवसर मिलना चाहिए। लेकिन सुधार की संभावना का अर्थ यह नहीं हो सकता कि समाज किसी गंभीर अपराध को भूल जाए या किसी दूसरे बच्चे को उसी खतरे के सामने छोड़ दे।”

केमिकल कास्ट्रेशन पर हो राष्ट्रीय विमर्श
उन्होंने स्पष्ट किया कि छेड़छाड़ से लेकर बलात्कार तक के गंभीर यौन अपराधों में त्वरित जाँच और स्पीडी ट्रायल होना चाहिए और दोष सिद्ध होने पर निश्चित एवं कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। श्री मिश्रा ने एक कड़ा सुझाव देते हुए कहा कि गंभीर मामलों में ‘केमिकल कास्ट्रेशन’ जैसे सख्त प्रावधानों पर भी राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर कानूनी विमर्श होना समय की मांग है। आपको बता दें कि इस प्रक्रिया के माध्यम से अस्थायी तौर पर सेक्स की इच्छा और क्षमता को कंट्रोल किया जाता है। दक्षिण कोरिया, पोलैंड, इंडोनेशिया, रूस और अमेरिका के कुछ राज्यों (जैसे कैलिफोर्निया, टेक्सास, फ्लोरिडा) सहित कई देशों में गंभीर यौन अपराधों के लिए इसे कानूनी सजा के तौर पर लागू किया गया है।

बने ‘नेशनल सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्ट्री’ और हो अनिवार्य जाँच
शिक्षा के क्षेत्र से गहराई से जुड़े होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने ‘नेशनल सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्ट्री’ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि,
न्यायालय द्वारा यौन अपराधों में दोषसिद्ध व्यक्तियों का रिकॉर्ड इस रजिस्ट्री में आजीवन सुरक्षित रहना चाहिए।
कानून और पीड़ित की निजता की सीमाओं के भीतर, गंभीर मामलों में दोषियों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए।
बच्चों के साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करने वाली संस्थाओं (जैसे स्कूल, हॉस्टल, आदि) में नियुक्ति से पहले इस रजिस्ट्री से अनिवार्य रूप से बैकग्राउंड जाँच की व्यवस्था होनी चाहिए।

निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया है अनिवार्य
श्री मिश्रा ने न्याय के मूल सिद्धांतों का समर्थन करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी कठोर व्यवस्थाएं केवल आरोपों के आधार पर लागू नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष न्यायिक जांच और न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद ही लागू होनी चाहिए। उनका यह विचार एक ऐसे सिस्टम की मांग करता है, जहाँ न्याय प्रक्रिया में अपराधी के सुधार की संभावना भी बनी रहे और समाज, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा की भी पूरी गारंटी हो।