अगर आप भी अपने बच्चों के लिए सिर्फ सरकारी नौकरी का ही सपना देख रहे हैं, तो अब आपको अपनी सोच बदलने की जरूरत है। दशकों तक जिस बिहार की पहचान दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने या फिर सरकारी बाबू बनने की रेस तक सीमित थी, वह अब बदल रहा है। कसबा के विधायक नितेश कुमार सिंह का मानना है कि बिहार अब बिजनेस और फैक्ट्रियां लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उनका कहना है कि 20 साल में जो सड़क और बिजली गांव-गांव पहुंची है, वह अब बिहार का भविष्य तय करेगी। जानिए आम आदमी और युवाओं के लिए विधायक नितेश सिंह ने निवेश और रोजगार पर क्या बड़ी बातें कही हैं।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
दशकों तक जिस बिहार की पहचान सिर्फ पलायन और सरकारी नौकरी की अंधी दौड़ तक सीमित रही, क्या अब वह तस्वीर वाकई बदल रही है? कसबा से विधायक नितेश कुमार सिंह का हालिया बयान इसी बदलते नैरेटिव की ओर इशारा करता है। उनका स्पष्ट मानना है कि बिहार अब इन्वेस्टमेंट के लिए पूरी तरह से तैयार है। सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी के मोर्चे पर जो बुनियादी ढांचा चाहिए था, वह खड़ा हो चुका है। लेकिन चुनौती सिर्फ फैक्ट्रियां लगाने की नहीं है, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता को बदलने की है जो ‘बिजनेस’ और ‘मुनाफे’ को शक की निगाह से देखती है। ‘द न्यूज स्कैन’ की इस खास रिपोर्ट में पढ़िए कि आखिर क्यों विधायक नितेश सिंह मानते हैं कि बिहार का टेकऑफ टाइम आ गया है और कैसे पूर्णिया जैसे शहरों की सफलता पूरे राज्य के लिए एक नजीर बन रही है।
- बिना सड़क और बिजली के कैसे लगता उद्योग?
किसी भी राज्य में कोई भी कारोबारी तब पैसा लगाता है, जब वहां सड़क और बिजली हो। विधायक नितेश कुमार सिंह ने साफ कहा कि पिछले 20 सालों में बिहार में इसका पूरा जाल बिछ चुका है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसी नई सड़कें बिहार के हर हिस्से को जोड़ रही हैं। पहले जहां घरों में डिबिया जलती थी, आज वहां कारखानों और मशीनों को चलाने के लिए भरपूर बिजली मौजूद है। गुंडाराज का डर खत्म हुआ है, जिससे कारोबारी अब यहां अपना पैसा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विधायक के शब्दों में, “बिहार का अब टेकऑफ टाइम यानी उड़ान भरने का समय आ गया है।” - सबसे बड़ी चुनौती: ‘मुनाफा कमाने वाले’ को गलत नजर से देखना
बिहार की तरक्की में सबसे बड़ा रोड़ा कोई नेता या नीति नहीं, बल्कि हमारी पुरानी सोच है। विधायक नितेश सिंह ने बहुत पते की बात कही कि आज भी हमारे समाज में शादी-ब्याह के लिए सरकारी नौकरी वाले लड़के को ही खोजा जाता है। अगर कोई बिजनेस कर रहा है, तो लोग उसे शक की नजर से देखते हैं। समाज को समझना होगा कि बिजनेस करने वाला अगर ‘मुनाफा’ कमा रहा है तो वह कोई पाप नहीं कर रहा। उसी मुनाफे से वह 10 और लोगों को रोजगार देता है, उन्हें सैलरी बांटता है और बैंक का कर्ज चुकाता है। - सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं, 30 दिन में मिलेगी मंजूरी
कोई युवा अगर अपना बिजनेस शुरू करना चाहता है, तो उसे सबसे ज्यादा डर सरकारी बाबुओं और दफ्तरों के चक्कर काटने से लगता है। विधायक ने बताया कि बिहार सरकार ने अब सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर दिया है। अब प्रदूषण, फायर या कोई भी एनओसी (NOC) लेने के लिए महीनों जूते नहीं घिसने होंगे। सरकार ने इसके लिए 30 दिन का समय तय कर दिया है। अगर 30 दिन में अधिकारी ने पेपर पास नहीं किया, तो उस अधिकारी पर कार्रवाई होगी। - पूर्णिया से समझिए कैसे आ रहा है बदलाव
विधायक ने हवा-हवाई बातें करने के बजाय पूर्णिया का सीधा उदाहरण दिया। कुछ साल पहले तक क्या कोई सोच सकता था कि पूर्णिया जैसे शहर में मेफेयर जैसे बड़े और महंगे होटल खुलेंगे? लेकिन आज यह सच है। जब एक बड़ा बिजनेस किसी शहर में आता है, तो वह अपने साथ और भी कई बिजनेस लेकर आता है। वहां के स्थानीय लड़कों को रोजगार मिलता है। एक की सफलता देखकर चार और व्यापारी उस शहर में पैसा लगाने आते हैं। - अब पलायन नहीं, अपनी जमीन पर उद्यमी बनेगा युवा
आज का युवा अब सब समझ रहा है। जो लड़के दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में पढ़ाई करके लौट रहे हैं, वे अब नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले यानी स्टार्टअप चाहते हैं। विधायक ने प्रवासी बिहारियों से भी हाथ जोड़कर अपील की है कि वे बिहार के बारे में सिर्फ नेगेटिव बातें न करें। बिहार में मखाना उद्योग, नए स्टार्टअप्स और नए हाईवे जैसी बहुत सी अच्छी चीजें हो रही हैं, उन्हें दुनिया को बताएं। जिस दिन बिहार की सफलता की कहानियां बाहर जाएंगी, उस दिन बिहार अपने आप रोजगार का नया केंद्र बन जाएगा।
































