बढ़ती दूरियों और नफरत के इस दौर में दुनिया को जिस शांति की तलाश है, वह पैगंबर मुहम्मद के भाईचारे वाले संदेश से ही मिल सकती है। मदीना मुनव्वरा के रूहानी सफर पर गए भागलपुर के सज्जादा नशीन सैयद शाह फख़्र-ए-आलम ने रौज़ा-ए-अक़दस पर हाजिरी देते हुए इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।
आज जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव, नफरत और आपसी दूरियां बढ़ रही हैं, ऐसे में पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा का प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश ही दुनिया को सुकून दे सकता है। यह बात भागलपुर स्थित खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादा नशीन सैयद शाह फख़्र-ए-आलम हसन ने कही है। वे इन दिनों मदीना मुनव्वरा के आध्यात्मिक सफर पर हैं।
जिंदगी का सबसे खुशनसीब पल
सज्जादा नशीन ने पैगंबर हज़रत मुहम्मद के रौज़ा-ए-अक़दस (पवित्र मज़ार) की मुबारक जाली के सामने हाजिरी दी और सलातो-सलाम पेश किया। इस अनुभव को उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे रूहानी और खुशनसीब पल बताया। उन्होंने कहा, “रौज़ा-ए-रसूल के सामने खड़े होने का मौका मिलना सिर्फ अल्लाह का करम और उसके प्यारे हबीब का सदका है।” इस मुबारक सफर में उनके साथ उनके बेटे सैयद साद अल-हुसैनी और उस्मान अली शरफ़ शाह भी मौजूद हैं।
मदीना: इंसानियत के मार्गदर्शन का केंद्र
मदीना की पाक धरती को इंसानियत के मार्गदर्शन का केंद्र बताते हुए सज्जादा नशीन ने कहा कि इसी जगह से रसूल-ए-अकरम ने दुनिया को एकेश्वरवाद, न्याय, दया और अच्छे चरित्र का महान संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि पैगंबर का पूरा जीवन, उनकी शिक्षाएं और उनका पैगाम सिर्फ किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत है। अगर कोई भी इंसान अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र में पैगंबर की शिक्षाओं को अपना ले, तो उसका जीवन प्रेम और करुणा से भर जाएगा।

बुरे बर्ताव का जवाब भी भलाई से दिया
उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम ने अपने बेहतरीन चरित्र से लोगों के दिल जीते। इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े विरोध और तकलीफों के बावजूद उन्होंने कभी क्षमा, सब्र और इंसानियत की भलाई का रास्ता नहीं छोड़ा। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में अरबों लोग रसूलुल्लाह से बेपनाह मोहब्बत करते हैं और मदीना आकर अपनी इस जुड़ाव पर गर्व महसूस करते हैं।
इंसानियत की भलाई के लिए मांगी दुआ
अपने जज्बात जाहिर करते हुए सज्जादा नशीन ने कहा, “हमें जो कुछ भी मिला है, वह पैगंबर से जुड़कर ही मिला है।” अंत में उन्होंने अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ की कि इस हाजिरी को कुबूल फरमाया जाए। उन्होंने अपने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों के साथ-साथ पूरी इंसानियत की भलाई, शांति और बरकत के लिए खास दुआ की और समाज में प्रेम का संदेश आम करने की तौफीक मांगी।
































