आधुनिक चिकित्सा विज्ञान बिना रेडियोलॉजी के वैसा ही है, जैसे बिना आंखों के किसी भूलभुलैया को पार करना। शरीर के अंदर पल रही गंभीर बीमारियों का सिर्फ बाहरी लक्षणों के आधार पर शत-प्रतिशत सटीक अनुमान लगाना आज के वैज्ञानिक युग में संभव नहीं है। छाती का दर्द मामूली गैस का है, फेफड़ों का संक्रमण है, या फिर हार्ट अटैक की दस्तक… यह तय करने में रेडियोलॉजी ही सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। पूर्णिया स्थित ईशान डायग्नॉस्टिक के संस्थापक और वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश से समझिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई का पूरा विज्ञान। जानिए सटीक जांच के बिना क्यों असंभव है सही इलाज।
डॉ. मुकेश स्पष्ट करते हैं कि बिना पुख्ता जांच के दवा देना या सर्जरी करना ‘अंधेरे में तीर चलाने’ जैसा है। सटीक रेडियोलॉजिकल साक्ष्यों के अभाव में न सिर्फ इलाज भटक सकता है, बल्कि इससे मरीज की जान को भी गंभीर खतरा हो सकता है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों में शुरुआती पहचान ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। मैमोग्राफी के जरिए स्तन कैंसर और लो-डोज़ सीटी स्कैन (LDCT) के जरिए फेफड़ों के कैंसर को तब पकड़ा जा सकता है, जब ट्यूमर इतना छोटा हो कि उसके कोई शारीरिक लक्षण भी न उभरे हों। समय रहते बीमारी पकड़ में आने से उसे जड़ से खत्म करने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
किस बीमारी में कौन सी मशीन आती है काम?
अक्सर मरीजों को यह समझ नहीं आता कि डॉक्टर ने उन्हें कौन सी जांच क्यों लिखी है। डॉ. मुकेश इसे बेहद आसान शब्दों में समझाते हैं:
एक्स-रे (X-Ray): हड्डियों के टूटने और छाती के संक्रमण (टीबी या निमोनिया) को तुरंत पकड़ने के लिए यह आज भी सबसे कारगर और तेज तकनीक है।
अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यह पूरी तरह रेडिएशन-मुक्त और सुरक्षित तकनीक है। गर्भवती महिलाओं के गर्भ में शिशु का विकास देखने, पेट के रोगों, गॉल ब्लैडर की पथरी और एक्सीडेंट के बाद अंदरूनी ब्लीडिंग का पता लगाने में इसका कोई सानी नहीं है।
सीटी स्कैन (CT Scan): यह एक्स-रे का ही उन्नत 3D रूप है। सिर की गंभीर चोट, स्ट्रोक (लकवा) और पेट की जटिल बीमारियों की विस्तृत क्रॉस-सेक्शनल जानकारी चंद सेकंड में देने के लिए आपात स्थिति में इसका इस्तेमाल होता है।
एमआरआई (MRI): बिना रेडिएशन वाली यह तकनीक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र पर काम करती है। मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, नसों और जोड़ों (लिगामेंट) की सबसे गहरी और सूक्ष्म जांच के लिए यह तकनीक बेजोड़ है।
अब बिना चीर-फाड़ के हो रहा जटिल इलाज
रेडियोलॉजी का क्षेत्र अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है। ‘इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी’ (IR) ने इलाज की दुनिया में क्रांति ला दी है। इसके जरिए डॉक्टर मशीन की स्क्रीन पर अंदरूनी अंगों को लाइव देखकर, सुई या पतली ट्यूब (कैथेटर) के माध्यम से कैंसर के ट्यूमर को नष्ट करने, सिकुड़ी नसों को खोलने और मवाद निकालने जैसे जटिल काम कर रहे हैं। इसमें बड़े चीरे की जरूरत नहीं होती, जिससे मरीज को दर्द कम होता है और वह जल्दी घर लौट जाता है।
रेडिएशन का डर और गुणवत्ता की अहमियत
समाज में यह भ्रांति है कि हर इमेजिंग मशीन से हानिकारक किरणें निकलती हैं। हकीकत यह है कि एमआरआई और अल्ट्रासाउंड पूरी तरह सुरक्षित हैं। वहीं, एक्स-रे और सीटी स्कैन में भी आधुनिक मशीनों के जरिए रेडिएशन का स्तर न्यूनतम रखा जाता है।
अंततः, जांच की गुणवत्ता ही सही इलाज की दिशा तय करती है। इसलिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि आपकी जांच एनएबीएच (NABH) मानकों का पालन करने वाले डायग्नोस्टिक सेंटर में अत्याधुनिक मशीनों द्वारा हो, जिसकी रिपोर्टिंग कोई तकनीशियन नहीं, बल्कि एक विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट कर रहा हो। जागरूकता और समय पर की गई सटीक जांच ही गंभीर बीमारियों के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी ढाल है।
































