- भभुआ में 100 वर्षों से मुस्लिम भाई लगाते हैं छठ प्रसाद के लिए फल की दुकानें
प्रमोद कुमार, कैमूर
बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच महापर्व छठ ने एक बार फिर समाज में एकता और सौहार्द की मिसाल पेश की है। भभुआ शहर के एकता चौक पर इन दिनों दर्जनों फल की दुकानें सजी हुई हैं, जिन्हें पिछले 100 वर्षों से मुस्लिम परिवार छठ पर्व के अवसर पर लगाते आ रहे हैं।
इन दुकानों पर छठ पूजा में चढ़ाए जाने वाले हर प्रकार के फल मिल जाते हैं — केले, नारियल, अमरूद, सेव, सीताफल, अनार, खजूर और अंगूर तक। दुकानदार बताते हैं कि इन फलों को वे कई राज्यों से मंगाते हैं, ताकि छठ व्रत में शामिल लोगों को शुद्ध और ताजे फल मिल सकें।
नियास अहमद, शबान राइन और आमना खातून जैसे दुकानदार बताते हैं —“हमारे पूर्वजों के समय से यह परंपरा चली आ रही है। हर साल छठ के मौके पर हम फल की दुकान लगाते हैं। शुद्धता और सफाई का खास ध्यान रखा जाता है, क्योंकि यह हमारे हिन्दू भाइयों का पवित्र पर्व है।”
भभुआ के 80 वर्षीय बुजुर्ग लल्लू प्रसाद याद करते हैं कि बचपन से वे यही नज़ारा देख रहे हैं।
“मेरी याददाश्त में जबसे होश संभाला, मुस्लिम भाई हर साल छठ के मौके पर फल बेचते हैं। यह परंपरा अब सौ साल पुरानी हो चुकी है। दोनों समुदाय एक-दूसरे के त्योहार में शामिल होते हैं। यही बिहार की असली पहचान है।”
छठ पर्व के दो दिनों तक भभुआ के बाजारों में रौनक बनी रहती है। एक सप्ताह पहले से ही मुस्लिम परिवार अपने स्टॉल सजाने में जुट जाते हैं। लोग कहते हैं कि इस पर्व में केवल व्रत ही नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और इंसानियत की मिठास भी झलकती है।
भभुआ का यह दृश्य पूरे बिहार के लिए एक प्रेरणा है — जहां धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत का रिश्ता निभाया जाता है। छठ के अवसर पर यह परंपरा हिन्दू-मुस्लिम एकता की वह मिसाल है, जिस पर कैमूर जिला गर्व कर सकता है।

































