बिहार सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक ने राज्य के शहरीकरण के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ ला दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लिए गए 22 बड़े फैसलों ने न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बल्कि आम आदमी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा को भी केंद्र में रखा है। 11 शहरों में नई सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण और विकास कार्यों की झड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाली है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
इससे अनियोजित निर्माण पर लगाम लगेगा और तमाम शहर भविष्य में स्मार्ट बनेंगे। सरकार ने पटना, गया, मुंगेर, भागलपुर और पूर्णिया समेत 11 शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है। यह सुनने में कड़ा फैसला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की दूरदर्शिता महत्वपूर्ण है।
फायदा: इससे शहरों का विस्तार झुग्गी-झोपड़ियों या संकरी गलियों के रूप में नहीं, बल्कि एक मास्टर प्लान के तहत होगा। आम जनता को चौड़ी सड़कें, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और सुनियोजित पार्क मिलेंगे। यह ‘रियल एस्टेट माफिया’ के नेक्सस को तोड़कर आम खरीदारों के हितों की रक्षा करेगा।
‘पुलिस दीदी’ की तैनाती का उद्देश्य भी सराहनीय है। इससे गलियां और सड़कें बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी। छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए 4700 ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती का फैसला सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।
फायदा: स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों के मन में सुरक्षा का भाव जागेगा। 1500 स्कूटी और 3200 मोटरसाइकिलों के साथ पुलिस की गश्त बढ़ने से मनचलों पर नकेल कसेगी और महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर अधिक आत्मविश्वास के साथ निकल सकेंगी।
बुजुर्गों की आवश्यकता को देखते हुए उनके सम्मान में फैसला लिया गया है कि अब घर बैठे होगी रजिस्ट्री होगी। 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए जमीन की रजिस्ट्री और निबंधन की विशेष सुविधा का प्रावधान किया गया है।
फायदा: अब बुजुर्गों को तहसील या कचहरी के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकारी तंत्र स्वयं उनके पास पहुंचेगा, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी।
धार्मिक पर्यटन को देखते हुए कनेक्टिविटी की दिशा में भी फैसले लिए गए हैं। सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर को वाराणसी के ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ की तर्ज पर विकसित करने के लिए 680 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। साथ ही सोनपुर और भागलपुर के अजगैबीनाथ धाम में नए एयरपोर्ट (ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे) के विकास की प्रक्रिया शुरू हुई है।
फायदा: इससे बिहार में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से राज्य में निवेश के रास्ते खुलेंगे।
शिक्षा सुधार और तकनीकी विकास का हब बनाने को लेकर भी योजनाएं हैं। पुनपुन (पटना) में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी का कैंपस बनेगा। बेगूसराय में निफ्ट (NIFT) के लिए जमीन का फैसला हुआ है। IIT पटना के लिए 305 करोड़ का रिसर्च पार्क और इनक्यूबेशन सेंटर की भी योजना है। 75 ITI संस्थानों के कायाकल्प का भी फैसला लिया गया है।
फायदा: बिहार के छात्र-छात्राओं को अब उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को आधुनिक उद्योगों के लिए तैयार किया जा सकेगा।
सरकार का यह ‘एक्शन’ और ‘लॉन्ग टर्म विजन’ दर्शाता है कि वह केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक सुव्यवस्थित बिहार की नींव रख रही है। सैटेलाइट टाउनशिप से पुराने शहरों पर आबादी का बोझ कम होगा, जिससे जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार आएगा। यह फैसले सीधे तौर पर आम आदमी की जेब, सुरक्षा और स्वाभिमान से जुड़े हैं।
































