कॉलेज की पढ़ाई के साथ सीधे नौकरी की तैयारी… बिहार सरकार का बड़ा फैसला

अब तक बिहार के कॉलेजों में सिर्फ किताबों से पढ़ाई होती थी, जिसका असली नौकरी की दुनिया से ज्यादा लेना-देना नहीं होता था। अब सरकार ने तय किया है कि बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट संस्थान सीधे सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के अंदर आएंगी। वे न सिर्फ बच्चों को पढ़ाएंगी, बल्कि उन्हें अपने दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम भी सिखाएंगी।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जानिए कि आम जनता और छात्रों को इससे क्या-क्या सीधे फायदे होंगे?
पढ़ाई के साथ-साथ हर महीने स्टाइपेंड:
अब छात्रों को सिर्फ क्लास में बैठकर रट्टा नहीं मारना होगा। उन्हें कंपनियों और बैंकों में जाकर इंटर्नशिप या काम सीखना अनिवार्य रूप से करना पड़ेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इस दौरान कंपनियों की तरफ से छात्रों को हर महीने कुछ पैसे भी मिलेंगे, जिससे वे अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकेंगे।

बिना भटके कॉलेज से ही मिलेगी नौकरी
अक्सर देखा जाता है कि डिग्री पूरी होने के बाद बच्चे नौकरी ढूंढने के लिए दूसरे बड़े शहरों के चक्कर काटते हैं। अब इस नई व्यवस्था से बड़ी-बड़ी निजी कंपनियां खुद कॉलेजों में आएंगी, बच्चों को उनकी पसंद और जरूरत के हिसाब से खास ट्रेनिंग देंगी और वहीं से सीधे नौकरी पर रख लेंगी।

नई तकनीक सीखने का मौका:
आजकल बाजार में कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बहुत मांग है। साधारण परिवारों के बच्चे इन नई तकनीकों को सीखने के लिए महंगे कोचिंग की फीस नहीं दे पाते। अब नामचीन कंपनियां खुद कॉलेजों के अंदर अपने खर्चे पर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (खास ट्रेनिंग सेंटर) बनाएंगी, जहाँ बच्चे बहुत ही आसानी से आज के जमाने का हुनर सीख सकेंगे।

किताबी ज्ञान की जगह व्यावहारिक अनुभव:
पहले और अब की व्यवस्था में यही सबसे बड़ा अंतर है। पहले जहां छात्र केवल थ्योरी पढ़ते थे और डिग्री के बाद भी बेरोजगार घूमते थे, वहीं अब कंपनियों के मैनेजर खुद यूनिवर्सिटी को बताएंगे कि बाजार में किस काम की मांग है और उसी हिसाब से पढ़ाई का सिलेबस तैयार होगा। इसका मतलब है कि जब छात्र कॉलेज से बाहर निकलेगा, तो उसके हाथ में सिर्फ कागज की डिग्री नहीं होगी, बल्कि काम करने का असली अनुभव और नौकरी का मौका भी होगा।

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
बिहार सरकार और कंपनियों का यह मेल आम परिवार के बच्चों के लिए एक वरदान जैसा है। अब एक गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार का बच्चा भी बिना लाखों रुपए खर्च किए वैसी ही बेहतरीन ट्रेनिंग पा सकेगा, जैसी बड़े शहरों के महंगे प्राइवेट कॉलेजों में मिलती है। इससे बिहार के बच्चों का दूसरे राज्यों में पलायन रुकेगा और उन्हें अपने घर-राज्य में ही तरक्की के सबसे बेहतर अवसर मिलेंगे।