भागलपुर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. हेमशंकर शर्मा को सम्मान मिला है। डॉ. शर्मा का सम्मान चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए किया गया है। चिकित्सा के वर्तमान से लेकर भविष्य और खासकर एआई के उपयोग को लेकर भी उन्होंने तमाम बातें की हैं। वे स्पष्ट मानते हैं कि एआई कभी भी मानव का विकल्प नहीं हो सकता। हां, मजबूत मददगार जरूर हो सकता है।
वैशाली में आयोजित ‘भारतीय नैदानिक चिकित्सा संघ’ (Indian Association of Clinical Medicine – IACM) के बिहार राज्य सम्मेलन में डॉ. शर्मा को ‘उत्कृष्ट नैदानिक चिकित्सा शिक्षक सम्मान’ से अलंकृत किया गया। यह पुरस्कार चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण और उत्कृष्टता का प्रमाण है। डॉ. शर्मा ने चिकित्सा शिक्षा में हमेशा नवीन और आधुनिक तौर-तरीकों (Modern Teaching Methodologies) को लागू करने पर जोर दिया है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आने वाली पीढ़ी के डॉक्टर नवीनतम मेडिकल एडवांसमेंट से भली-भांति परिचित हों। एक उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में, उन्होंने अनगिनत युवा और नवोदित चिकित्सकों का मार्गदर्शन (Mentorship) किया है। उनके दिशा-निर्देश में कई छात्रों ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि क्लिनिकल प्रैक्टिस पर भी विशेष ध्यान दिया है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) पर डॉ. शर्मा का दृष्टिकोण
सम्मेलन के दौरान, डॉ. शर्मा ने वर्तमान समय के सबसे ज्वलंत विषय, चिकित्सा के क्षेत्र में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) के बढ़ते उपयोग पर भी अपने विचार साझा किए। उनका यह दृष्टिकोण इस बात को स्पष्ट करता है कि तकनीक को कैसे अपनाया जाना चाहिए। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि भले ही तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, एआई कभी भी एक कुशल और मानवीय संवेदनाओं वाले डॉक्टर की जगह नहीं ले सकती। मशीनें मानवीय स्पर्श, सहानुभूति और अनुभव से लिए गए त्वरित निर्णयों की बराबरी नहीं कर सकतीं। उन्होंने एआई को एक बेहतरीन सहायक तकनीक बताया। इसका उपयोग डेटा विश्लेषण, बीमारियों की जटिल जांच और त्वरित रिपोर्ट तैयार करने में किया जा सकता है, जो अंततः डॉक्टर की सहायता ही करेगा। एआई के प्रयोग से डॉक्टरों का समय बचेगा और उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी। जटिल मामलों को सुलझाने में एआई एक बेहतरीन टूल साबित हो सकता है। अंततः एआई के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा मरीजों को ही होगा। सही और सटीक निदान (Accurate Diagnosis) से मरीजों को बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में अभूतपूर्व सहयोग मिलेगा।
डॉ. हेमशंकर शर्मा को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना है, बल्कि यह पूरे बिहार के चिकित्सा समुदाय के लिए गर्व का क्षण है। साथ ही, तकनीक और चिकित्सा के तालमेल पर उनका नजरिया यह बताता है कि भविष्य की चिकित्सा प्रणाली मानवीय संवेदनाओं और उन्नत तकनीक के सफल संयोजन पर निर्भर करेगी।
































