डिजिटल दौर में सोशल मीडिया कब किस पुरानी याद को वर्तमान की सियासत का हथियार बना दे, कहना मुश्किल है। कुछ ऐसा ही मामला इन दिनों बिहार की राजनीति और सोशल मीडिया ट्रेंड्स में देखने को मिल रहा है। दरभंगा के अलीनगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा विधायक और देश की मशहूर लोकगायिका मैथिली ठाकुर का एक पुराना वीडियो इस समय इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
इस वीडियो में मैथिली ठाकुर मशहूर लोकगीत ‘सखी सैयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है’ गाती नजर आ रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह वीडियो तब का है जब मैथिली का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था और वे विशुद्ध रूप से एक उभरती हुई लोकगायिका थीं। लेकिन आज, उनके राजनीतिक सफर की बदली हुई हकीकत ने इस पुराने वीडियो को एक बड़े सियासी कटाक्ष में तब्दील कर दिया है।
क्यों अचानक ट्रेंड होने लगा यह पुराना वीडियो?
इस वीडियो के अचानक चर्चा में आने की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ दिनों में देश और बिहार के भीतर आर्थिक मोर्चे पर आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है:
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी: पिछले 12 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दामों में चौथी बार वृद्धि दर्ज की गई है।
घरेलू बजट पर असर: बिहार में सुधा डेयरी के दूध और उससे जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसने सीधे तौर पर रसोई के बजट को प्रभावित किया है।
जब जमीन पर आम जनता महंगाई की इस दोहरी मार को झेल रही है, ठीक उसी वक्त नेटिजन्स और विपक्षी दलों ने मैथिली ठाकुर के इस पुराने गीत को ढूंढ निकाला। विपक्ष के समर्थक और आम सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को मौजूदा मूल्य वृद्धि के खिलाफ एक रचनात्मक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम डिजिटल युग की एक नई चुनौती को रेखांकित करता है, जहां किसी भी कलाकार का अतीत उसके राजनीतिक वर्तमान से टकरा सकता है। यूजर्स सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शंस में मजाकिया और तीखे लहजे में लिख रहे हैं कि मैथिली जी का यह सुर मौजूदा दौर की आर्थिक स्थिति पर और भी सटीक बैठता है। कुछ लोग तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि ‘महंगाई अब पहले से ज्यादा प्रभावी हो गई है।’
चूंकि मैथिली ठाकुर अब केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि बिहार की सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) की विधायक हैं, इसलिए विपक्ष को सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधने का एक बेहद अनूठा और आक्रामक मौका मिल गया है। विधायक के अपने ही पुराने सुर अब सरकार के खिलाफ एक जनभावना की आवाज बनकर शेयर किए जा रहे हैं।
यह वायरल वीडियो इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे समय बदलने के साथ कला के मायने और उसके निहितार्थ बदल जाते हैं। जिस गीत को मैथिली ठाकुर ने कभी समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा और दर्द को बयां करने के लिए गाया था, आज वही गीत उनके विधायक बनने के बाद सत्ता के लिए एक असहज करने वाला सवाल बन चुका है।
































