बांकीपुर उपचुनाव: परदे के पीछे के रणनीतिकार प्रशांत किशोर खुद उतरे चुनावी अखाड़े में, कहा, ‘मेरी जीत से सरकार नहीं, बिहार की राजनीति बदलेगी’

बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से आ रही है। लंबे समय तक देश की राजनीति में परदे के पीछे रहकर चुनावी बिसात बिछाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) अब खुद प्रत्यक्ष रूप से चुनावी अखाड़े में कूद गए हैं। ‘जनसुराज’ की कोर कमेटी की अहम बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट से उपचुनाव लड़ेंगे।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
उम्मीदवार घोषित होने के तुरंत बाद प्रशांत किशोर ने पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और अपने इरादे साफ कर दिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर का खुद प्रत्याशी बनना इस बात का संकेत है कि जनसुराज अब केवल एक जमीनी अभियान नहीं, बल्कि बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में स्थापित दलों (एनडीए और महागठबंधन) के सामने सबसे बड़ा तीसरा विकल्प बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। बांकीपुर की जंग अब बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय होने जा रही है।

अकेला विधायक सभी 242 पर भारी पड़ेगा: प्रशांत किशोर
चुनावी मैदान में उतरते ही प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को ललकारा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस उपचुनाव को महज एक सीट की जंग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मौजूदा सत्ता के खिलाफ जनता का एक बड़ा ‘जनमत संग्रह’ है। पीके ने बड़ा दावा करते हुए कहा, “अगर बांकीपुर की जनता के आशीर्वाद से मैं जीतकर विधानसभा पहुंचता हूँ, तो सदन के भीतर अकेले ही बाकी सभी 242 विधायकों पर भारी पड़ूँगा।” उन्होंने आगे जोड़ा कि बांकीपुर से उनकी जीत भले ही रातों-रात सरकार न बदले, लेकिन यह बिहार की राजनीति की दिशा और दशा को हमेशा-हमेशा के लिए बदल कर रख देगी।

जाति और मजहब के बंधनों को तोड़ने की अपील
बांकीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल और प्रबुद्ध मतदाताओं वाली सीट पर प्रशांत किशोर ने पारंपरिक वोटिंग पैटर्न को बदलने की अपील की है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस बार वोट देते समय जाति, दल, धर्म और मजहब के पुराने ढर्रे और बंधनों से ऊपर उठें और केवल एक बेहतर व योग्य उम्मीदवार का चुनाव करें। पीके ने दोटूक लहजे में कहा कि वे राजनीति के लिए बढ़िया हैं या खराब, इसका फैसला किसी बड़े राजनीतिक दल के दफ्तर या नेताओं के बंद कमरों में नहीं होगा, बल्कि बांकीपुर के आम मतदाता खुद अपने विवेक से तय करेंगे।

जनसुराज अकेले लड़ेगी चुनाव, सहयोगियों का स्वागत
गठबंधन की राजनीति के दौर में प्रशांत किशोर ने साफ किया है कि जनसुराज अपने दम पर और अकेले चुनाव मैदान में उतर रही है। हालांकि, उन्होंने राजनीतिक शुचिता और बदलाव का समर्थन करने वाले दलों के लिए रास्ते खुले रखते हुए कहा कि जो लोग बिहार के विकास के इस नए विजन के साथ आना चाहते हैं, उनका स्वागत है।