बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और पेशेंट ट्रॉली की कमी को दूर करने के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
अक्सर देखा जाता था कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुँचने पर मरीजों के परिजनों को स्ट्रेचर के लिए इधर-उधर भागना पड़ता था, लेकिन अब सरकार की इस सख्ती से व्यवस्था बदलने वाली है। जानिए कि क्या है सरकार की नई गाइडलाइन?
सरकार ने अस्पताल की श्रेणी के अनुसार उपकरणों की न्यूनतम संख्या निर्धारित कर दी है:
जिला अस्पताल: कम से कम 20 स्ट्रेचर, 19 पेशेंट ट्रॉली और पर्याप्त संख्या में व्हीलचेयर।
अनुमंडलीय अस्पताल: 12 स्ट्रेचर, 7 ट्रॉली और 8 व्हीलचेयर का होना अनिवार्य।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC): कम से कम 7 स्ट्रेचर, 7 ट्रॉली और 7 व्हीलचेयर उपलब्ध रहेंगे।
अतिरिक्त बैकअप: अस्पताल की बेड क्षमता के अनुसार 10% अतिरिक्त उपकरण स्टैंड-बाय मोड में रखे जाएंगे ताकि आपात स्थिति में कमी न हो।
आम जनता को होने वाले 3 बड़े फायदे
‘गोल्डन आवर’ में मिलेगा जीवनदान
हादसे या गंभीर बीमारी की स्थिति में शुरुआती समय (गोल्डन आवर) सबसे कीमती होता है। एम्बुलेंस से उतरते ही मरीज को तुरंत स्ट्रेचर मिलने से बिना देरी किए उसे इमरजेंसी वार्ड या ऑपरेशन थिएटर तक पहुँचाया जा सकेगा, जिससे जान बचने की संभावना बढ़ जाएगी।
परिजनों को मिलेगी मानसिक और शारीरिक राहत
अक्सर उपकरणों की कमी के कारण परिजनों को अपने मरीज को गोद में या चादर के सहारे उठाकर ले जाना पड़ता था। यह न केवल अमानवीय था, बल्कि मरीज के लिए भी खतरनाक था। अब अस्पताल के मुख्य द्वार और पार्किंग एरिया में इन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सुरक्षित स्थानांतरण (Safe Transfer)
अस्पताल के भीतर एक वार्ड से दूसरे वार्ड, एक्स-रे रूम या पैथोलॉजी लैब तक मरीज को ले जाने में अब परेशानी नहीं होगी। व्हीलचेयर और ट्रॉली की पर्याप्त संख्या से चलने में असमर्थ बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुगम सुविधा मिलेगी।
सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों और मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को स्पष्ट किया है कि इन उपकरणों की उपलब्धता में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है कि किसी भी मरीज के परिजन को ‘असुरक्षित’ तरीके से मरीज को न ले जाना पड़े।
































