किशनगंज में आवासीय प्रमाण पत्र के 1.27 लाख आवेदन, घुसपैठ का मुद्दा गरमाया

किशनगंज जिले में महज छह दिनों में आवासीय प्रमाण पत्र के लिए 1.27 लाख आवेदन प्राप्त होने से सियासी हलचल तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे घुसपैठियों की मौजूदगी का संकेत बताते हुए सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटे किशनगंज में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आना सामान्य नहीं है और यह स्थानीय प्रशासन की सतर्कता पर सवाल उठाता है। चौधरी ने केंद्र व राज्य सरकार से मामले की गहन जांच की मांग की है ताकि वास्तविक निवासियों और संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान हो सके। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

चौधरी ने RJD नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जनवरी से मई तक किशनगंज में हर महीने 26,000-28,000 आवेदन आते थे, लेकिन छह दिनों में 1.27 लाख आवेदन चौंकाने वाले हैं। उन्होंने तेजस्वी के ‘पाताल का रास्ता’ वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा, “जिनके परिवार ने चारा खाया और जमीन लिखवाई, उन्हें अपराध का रास्ता समझ नहीं आएगा।”

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, यह अभियान सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन आवेदनों की बाढ़ ने अधिकारियों को हैरान कर दिया। डीएम विशाल राज ने बताया कि लोग घबराहट में आवेदन कर रहे हैं, जिससे संख्या लगातार बढ़ रही है।

विपक्ष ने चौधरी के बयान की आलोचना की है। RJD का कहना है कि बिना सबूत घुसपैठ का आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।

इधर, बिहार में वोटर लिस्ट अपडेशन के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। सोमवार तक 2.896 करोड़ (36.47%) गणना प्रपत्र एकत्र हुए, जिसमें 11.26% ECINET पर अपलोड हो चुके हैं। किशनगंज की घटना ने जनसांख्यिकीय संरचना और सीमा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

वही इस मामले को लेकर डीएम विशाल राज ने कहा कि लोग पैनिक होकर आवासीय प्रमाण पत्र अप्लाई कर रहे हैं हालांकि जितने लोग अवश्य प्रमाण पत्र अप्लाई कर रहे हैं उसकी जांच की जाएगी

किशनगंज में आबादी से अधिक आधार कार्ड निर्माण का मामला उजागर: राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

किशनगंज जिले में आबादी से अधिक आधार कार्ड निर्माण का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किशनगंज, जो भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित है, में प्रोजेक्टेड जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड बनाए जाने की बात सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले की अनुमानित आबादी 20,26,541 है, जबकि 21,31,172 आधार कार्ड जारी किए गए हैं, जो 105.16% है। यह स्थिति न केवल किशनगंज, बल्कि सीमांचल के अन्य जिलों जैसे अररिया (102.23%), कटिहार (101.92%), और पूर्णिया (100.97%) में भी देखी गई है।हाल ही में किशनगंज पुलिस ने जियापोखर थाना क्षेत्र के गिलहाबारी गांव में छापेमारी कर एक फर्जी आधार कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में अशराफुल नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जो बांग्लादेशी और नेपाली घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। पुलिस ने उसके पास से कई फर्जी आधार कार्ड, लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, रेटीना स्कैनर मशीन, और नेपाली सिम कार्ड सहित अन्य उपकरण बरामद किए। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह गिरोह अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय पहचान पत्र उपलब्ध कराता था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।यह मामला केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध दस्तावेजों के नेटवर्क की गहरी साजिश को दर्शाता है। किशनगंज के एसपी सागर कुमार ने बताया कि दो अन्य संदिग्ध, जमाल और पंकज, फरार हैं, और उनकी तलाश में छापेमारी जारी है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है, लेकिन साथ ही सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी उठाई है।यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते कुछ नेता ऐसे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। किशनगंज और सीमांचल के अन्य जिलों में आधार कार्ड केंद्रों पर भीड़ और बाहरी लोगों की मौजूदगी इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। केंद्र और राज्य सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो और फर्जी दस्तावेजों का यह खेल रोका जा सके।