UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ही नहीं लगाई, गंभीर टिप्पणियां भी की… जानिए टिप्पणियों के क्या हैं मायने

न्यूज स्कैन ब्यूरो, नई दिल्ली
उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए लाए गए विवादित UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा हथौड़ा चलाया है। अदालत ने अगले आदेश तक इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है और स्पष्ट किया है कि फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 75 साल बाद हम कहाँ जा रहे हैं?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने नए नियमों की मंशा और भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि नियमों की मौजूदा भाषा समाज को बांटने वाली है। शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के प्रावधान देश की एकता के लिए खतरा बन सकते हैं। ‘अस्पष्ट’ करार देते हुए कहा कि इसके दुरुपयोग की पूरी संभावना है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आजादी के 75 वर्षों के बाद क्या हम जाति-विहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं या पीछे? नियमों में भेदभाव की परिभाषा को सीमित करना न्यायसंगत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि इन नियमों की समीक्षा के लिए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और न्यायविदों की एक कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी इस बात पर विचार करेगी कि नियमों को बिना किसी भेदभाव के कैसे लागू किया जा सकता है। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी (UGC) को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई 19 मार्च को होगी। इस फैसले का छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक वर्गों ने स्वागत किया है, जो पहले से ही इन नियमों को भेदभावपूर्ण बता रहे थे।