बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी शिक्षकों के ट्रांसफर और पदस्थापन के लिए बुधवार को एक नई नीति जारी की है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने की प्रवृत्ति को खत्म करना और मानवीय परिस्थितियों का सामना कर रहे शिक्षकों को एक पारदर्शी प्रणाली के तहत राहत प्रदान करना है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
आसान भाषा में नई तबादला नीति के मुख्य और अनिवार्य प्रावधान को जानिए जो आपको समझना चाहिए।
5 वर्ष का अनिवार्य नियम: नई नीति के तहत राज्य में सरकारी शिक्षकों की प्रत्येक पांच साल की सेवा पूरी होने के बाद अनिवार्य तौर पर उनका तबादला किया जाएगा।
स्थानांतरण के विकल्प: तबादले की प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अपनी पसंद के 10 विकल्प चुनने का मौका मिलेगा।
स्थानीय निकाय शिक्षकों को छूट: प्रत्येक पांच साल पर अनिवार्य तबादले का यह नया प्रावधान स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षकों पर लागू नहीं होगा।
प्रथम चरण की रूपरेखा: पहले चरण में केवल स्थानीय निकाय के शिक्षकों को छोड़कर अन्य विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की व्यवस्था की गई है।
प्राथमिकताओं का स्पष्ट पदानुक्रम
स्थानांतरण प्रक्रिया को न्यायसंगत बनाने के लिए नई नीति में क्रम के आधार पर प्राथमिकताएं तय की गई हैं:
बीमारी और दिव्यांगता को सर्वोच्च प्राथमिकता: तबादले में असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षकों को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी। इसके ठीक बाद गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, और ऑटिज्म या मानसिक रूप से दिव्यांग शिक्षकों को तरजीह दी जाएगी।
गंभीर बीमारियों का वर्गीकरण: किडनी, हृदय (हार्ट), और लीवर से संबंधित गंभीर बीमारियों को स्पष्ट रूप से गंभीर (असाध्य) बीमारी की श्रेणी में रखा गया है।
मेडिकल प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता: यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस नियम का दुरुपयोग न हो, दिव्यांगता और रुग्णता (बीमारी) के मामलों में केवल सिविल सर्जन कार्यालय स्तर से जारी किया गया प्रमाण-पत्र ही मान्य किया जाएगा।
महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए निर्धारित नियम
महिला शिक्षकों के लिए सहूलियत: इस नीति में महिला शिक्षकों के स्थानांतरण को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी गई है।
विशेष श्रेणियां: विधवा एवं परित्यक्त शिक्षिकाओं को राहत देने के लिए उनके लिए एक अलग श्रेणी का निर्माण किया गया है।
परिवार को साथ रखने की पहल: महिला शिक्षकों को उनके पति के पदस्थापन (पोस्टिंग वाली जगह) के आधार पर भी स्थानांतरण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
पुरुष शिक्षकों की पदस्थापना: पुरुष शिक्षकों के लिए जिले के भीतर उपलब्ध रिक्त पदों (वैकेंसी) के आधार पर स्थानांतरण का प्रावधान तय किया गया है।
शिक्षा विभाग की यह नीति एक ओर जहां सिस्टम में रोटेशन सुनिश्चित करेगी, वहीं दूसरी ओर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों, दिव्यांगों और महिलाओं को ट्रांसफर पोस्टिंग में होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानी से बचाएगी। 10 विकल्पों का प्रावधान शिक्षकों को अपने अनुकूल कार्यस्थल चुनने की आंशिक स्वतंत्रता भी प्रदान करता है।
































