महाअभियान : बिहार में 6 करोड़ लोगों की होगी ‘डोर-टू-डोर’ स्वास्थ्य जांच, बनेगा डिजिटल हेल्थ कार्ड; जानें प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का मास्टरप्लान क्या है

बिहार के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो गई है। बीमार होने के बाद अस्पताल जाने की मजबूरी को खत्म करते हुए, राज्य सरकार अब खुद चलकर मरीजों के दरवाजे तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऊर्जा ऑडिटोरियम में राज्यव्यापी ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान का शुभारंभ किया है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
30 नवंबर तक चलने वाले इस महाअभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के 6 करोड़ लोगों की घर-घर जाकर मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस पहल का सबसे अहम पहलू हर नागरिक का ‘डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड’ तैयार करना है, जो भविष्य में इलाज की दिशा तय करेगा।

रिपोर्ट के मुख्य जा आपके लिए जानना और समझना आवश्यक है।

  1. प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (Preventive Healthcare) की ओर यह एक बड़ा कदम है। यह अभियान बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के नजरिए में एक ‘पैराडाइम शिफ्ट’ (Paradigm Shift) है। आमतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग गंभीर बीमारी के लक्षण उभरने के बाद ही अस्पताल का रुख करते हैं, जिससे इलाज जटिल और खर्चीला हो जाता है। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने से बीमारियों की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाएगी, जिससे गंभीर होने से पहले ही उनका इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  2. किन बीमारियों की होगी जांच और क्या है दायरा?
    अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लाइफस्टाइल और गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग करेंगे। मुख्य तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, सामान्य कैंसर, हृदय रोग, सांस एवं फेफड़ों से जुड़े रोग और फैटी लीवर की जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त लगभग एक करोड़ लोगों की एनीमिया यानी खून की कमी की भी जांच की जाएगी। सभी 38 जिलों के लिए विशेष ‘जागरूकता रथ’ रवाना किए गए हैं, ताकि इस अभियान को जन-आंदोलन बनाया जा सके। जिलाधिकारियों को इसकी सख्त मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
  3. डिजिटल हेल्थ कार्ड: भविष्य के इलाज की कुंजी
    इस महा-अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘डिजिटल हेल्थ कार्ड’ का निर्माण होगा। जांच के बाद हर व्यक्ति का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। भविष्य में जब भी मरीज किसी अस्पताल में जाएगा, डॉक्टर इस कार्ड के जरिए उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री देख सकेंगे। इससे इलाज अधिक सटीक, प्रभावी और समयबद्ध हो सकेगा। जरूरत के अनुसार मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला अस्पतालों तक इलाज की सुविधा मिलेगी।
  4. ‘मिशन कायाकल्प’ से सुधरेगी जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था
    इस महा-अभियान के समानांतर सरकार ‘मिशन कायाकल्प’ भी शुरू कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (SHC) और उपकेंद्रों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना है। बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पंचायत स्तर पर ही मिल सकेंगी।
  5. जिला अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा: रेफरल में आई कमी
    रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि बिहार के जिला और अनुमंडल अस्पतालों के बुनियादी ढांचे में तेजी से सुधार हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों का भरोसा लौटा है। पहले इन अस्पतालों में 36 प्रकार की सर्जरी होती थी, जिसे बढ़ाकर अब 45 प्रकार का कर दिया गया है। जून महीने में जहां 2428 ऑपरेशन हुए थे, वहीं अगस्त में यह आंकड़ा तीन गुना से अधिक बढ़कर 8000 को पार कर गया। नतीजतन, छोटे अस्पतालों से बड़े मेडिकल कॉलेजों (जैसे PMCH/NMCH) में मरीजों को बेवजह रेफर किए जाने के मामलों में भारी कमी आई है।
  6. युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के अवसर
    स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ सरकार ने रोजगार सृजन पर भी ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य के नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कदम से बिहार के स्वास्थ्यकर्मियों को देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

बिहार सरकार का ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान सिर्फ एक रूटीन हेल्थ चेकअप नहीं है, बल्कि यह राज्य के हेल्थकेयर सिस्टम को ‘रिएक्टिव’ (बीमारी के बाद इलाज) से ‘प्रोएक्टिव’ (बीमारी होने से रोकना) बनाने की एक सुविचारित रणनीति है। उपमुख्यमंत्रियों और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह अभियान यदि अपनी तय रूपरेखा और डी.एम. की सख्त मॉनिटरिंग के साथ 30 नवंबर तक सही ढंग से जमीन पर उतरता है, तो यह बिहार के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।