कुदरत की आपदा से तबाह हुए किसान, 4 वर्षों में तीन-तीन बार नष्ट हुई फसलें, नहीं मिला मुआवजा

19 अप्रैल 2025 को परबत्ता में आए तुफान के बाद नष्ट हुई केले की फसल।(पुरानी तस्वीर)
रितेश कुमार । परबत्ता
खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत कुल्हरिया, भरसों, बैसा, देवरी एवं पिपरालतीफ पंचायत के करीब दर्जन भर गांव के किसान बीते चार वर्षों से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उनके नुकसान का भरपाई सरकार की तरफ से नहीं की गई है। ऐसे में किसान अब सरकार से क्षति-पूर्ति देने की गुहार लगा रहे हैं। दरअसल बीते वर्ष 2022 से 2025 तक तीन-तीन तुफान में इन किसानों के केले की फसल नष्ट हो गए थे। कुदरत की इस आपदा ने सैकड़ो एकड़ में केले की फसल लगाने वाले किसानों को कर्ज में डूबो दिया। जिनको आश्वासन के सिवा कुछ हासिल नहीं हो सका।किसानों पर पड़ा आर्थिक बोझपरबत्ता प्रखंड क्षेत्र के केला उत्पादक किसान पिछले चार वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल चुके हैं। लेकिन अब तक किसानों को एक बार भी फसल क्षति का मुआवजा नहीं मिल पाया है। इससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। वर्ष 2022 से 2025 तक प्रखंड के कुल्हरिया, भरसों, बैसा, देवरी और पिपरालतीफ पंचायत सहित कई गांवों में तेज आंधी से केले के पेड़ उखड़ गए थे। जिससे उनपर आर्थिक बोझ बढ़ गया। परिवार चलाने और कर्ज चुकाने की संकटइन किसानों का कहना है कि आंधी तूफान के कारण इनके खेतों में लगे मकई, गेहूं और केला की फसल को भारी नुकसान हुआ था। किसान पप्पू साह, धनंजय तिवारी, रोबिन तिवारी, गुरुचरण साह और सुनील शर्मा ने बताया कि तेज आंधी से लाखों रुपये की क्षति हुई है। कुल्हरिया गांव पंचायत के वार्ड संख्या 13 निवासी रोबिन कुमार ने कहा कि उनकी एक एकड़ में लगी पूरी फसल नष्ट हो गई। बैंक और ग्रामीणों से कर्ज लेकर की गई खेती अब भारी बोझ बन गई है। जब फसल पकने का समय आया तो आंधी सब उड़ा ले गई, अब कर्ज कैसे चुकाएं और परिवार कैसे चलाएं ?विधानसभा में भी उठ चुका है मामलाइन केलों के फसल मुआवजा को लेकर परबत्ता के तत्कालीन विधायक डॉ. संजीव कुमार ने बीते वर्ष बिहार विधानसभा में मामला उठाया था। उस समय किसानों को उम्मीद जगी थी कि उनको आसानी से मुआवजा मिलेगा। लेकिन विधानसभा चुनाव बाद परबत्ता में विधायक बदल गए और मामले को ठंडे वस्ते में डाल दिया गया। हलांकि कृषि विभाग के कर्मी द्वारा स्थलीय जांच कर रिपोर्ट विभाग को भेजे जाने की बात कही गई है। इस बावत प्रखंड कृषि पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्हें पदस्थापित हुए चार महीने हुए हैं और मामले की जानकारी विभाग से लेने के बाद ही कुछ कह सकते हैं।
































