कोसी-सीमांचल को भागलपुर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु पर अब मरम्मत के सबसे बड़े ऑपरेशन की शुरुआत हो गई है। सेतु पर वाहनों की आवाजाही को अगले करीब तीन महीने के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसी बेली ब्रिज का उद्घाटन कुछ ही महीने पहले पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने लाल कारपेट पर चलकर नारियल फोड़कर किया था। चौंकाने वाली बात यह कि पुल टूटने की असल वजह ओवरलोडिंग है। इस मूल समस्या पर सब खामोश नजर आएंगे।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के चार स्पैन पर बनाए गए अस्थायी बेली ब्रिज को हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। बेली ब्रिज को सुरक्षित तरीके से खोलने और हटाने के लिए सिक्किम से बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की विशेष टीम भागलपुर पहुंच चुकी है और बड़े क्रेनों की मदद से इस महा-ऑपरेशन को अंजाम दे रही है।

भ्रष्टाचार और ओवरलोडिंग ने ली थी पुल की बलि
ज्ञात हो कि विक्रमशिला सेतु का यह हश्र रातों-रात नहीं हुआ है। इसके पीछे भ्रष्टाचार, अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही की एक लंबी दास्तान है। स्थानीय लोगों और जानकारों के अनुसार, प्रशासन की कथित मदद और मिलीभगत से इस पुल पर लगातार बालू और गिट्टी से लदे ओवरलोडेड ट्रकों का अवैध परिचालन धड़ल्ले से चलता रहा। लगातार क्षमता से अधिक भार सहने के कारण पुल का ढांचा अंदर से खोखला हो गया था और यह ओवरलोड नहीं सह सका। परिणामतः 3 मई की रात सेतु का एक बड़ा स्लैब टूटकर गंगा नदी में समा गया।
लाल कारपेट पर चलकर हुआ था कामचलाऊ ब्रिज का उद्घाटन
भ्रष्टाचार की वजह से पुल टूटने के बाद जब छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए 7 जून 2026 को क्षतिग्रस्त हिस्से पर आनन-फानन में बेली ब्रिज तैयार किया गया, तो उसका भी भव्य जश्न मनाया गया था। पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने बाकायदा लाल कारपेट पर चलकर और नारियल फोड़कर इस अस्थायी बेली ब्रिज का उद्घाटन किया था। अब मात्र कुछ ही महीनों में उसी उद्घाटित बेली ब्रिज को उखाड़कर स्थायी समाधान की तरफ बढ़ना पड़ रहा है।
अब बनेगा मजबूत ‘ट्रस ब्रिज’
बीआरओ की टीम फिलहाल चारों स्पैन से बैली ब्रिज के अलग-अलग हिस्सों को खोलकर सुरक्षित तरीके से हटा रही है। इसके हटने के बाद इसी जगह स्थायी संरचना तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभागीय योजना के अनुसार, बेली ब्रिज हटने के बाद इन चार स्पैन (जिसमें एक पूरी तरह क्षतिग्रस्त स्पैन भी शामिल है) पर ‘ट्रस ब्रिज’ (Truss Bridge) का निर्माण किया जाएगा। ट्रस ब्रिज के निर्माण के साथ सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम पूरा किया जाएगा।
यात्रियों के लिए शुरू हुआ गंगा का जलमार्ग
विक्रमशिला सेतु पर परिचालन बंद रहने के कारण आम लोगों की परेशानी को देखते हुए गंगा नदी में जलमार्ग का विकल्प शुरू कर दिया गया है। आज से बड़े जहाजों (स्टीमर/रो-रो वेसल) के जरिए लोगों की यात्रा कराई जा रही है। अगले करीब तीन महीने तक, जब तक मरम्मत और ट्रस ब्रिज निर्माण के बाद सेतु पर दोबारा यातायात बहाल नहीं हो जाता, तब तक गंगा का यह जलमार्ग ही लोगों के लिए सफर का मुख्य और वैकल्पिक माध्यम बनेगा।
































