विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद बड़ा फैसला: बिहार के बड़े पुलों की फिटनेस जांचेगा आईआईटी बीएचयू

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन गंगा नदी में गिरने के बाद नीतीश सरकार ने राज्यभर के बड़े और चुनिंदा पुलों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया है। पथ निर्माण विभाग ने अब राज्य के बड़े पुलों की विस्तृत जांच और ऑडिट कराने की जिम्मेदारी ‘आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी’ को सौंपने का बड़ा फैसला किया है। विभाग इस वक्त विक्रमशिला सेतु की दोबारा बारीकी से जांच भी इसी प्रतिष्ठित संस्थान से कराने पर गंभीरता से मंथन कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को पूरी तरह रोका जा सके।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
मालूम हो कि विक्रमशिला सेतु के गिरे हुए हिस्से की शुरुआती जांच आईआईटी पटना ने की थी, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सस्पेंशन डेक के टूटने की वजह से पुल का स्पैन नदी में समा गया था। अब इस पुल के पुनर्स्थापन का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जा रहा है और वर्तमान रिपोर्ट के आधार पर इस पुल के चार स्पैन को नए सिरे से ‘स्टील स्ट्रक्चर’ के रूप में बनाने का मजबूत निर्णय लिया गया है।

इस महा-ऑडिट अभियान के तहत राज्यभर के 4,000 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के मुताबिक, इस व्यापक सर्वे में 34 पुल ऐसे पाए गए हैं जिन्हें तुरंत मरम्मत (इमीडिएट रिपेयर) की सख्त जरूरत है। इन चिन्हित पुलों को दुरुस्त करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनमें से 24 पुलों पर फिलहाल भारी वाहनों के आवागमन को रोककर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा रहा है, जिन्हें मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद दोबारा पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में पुल गिरने के कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद से ही पुलों की सेहत और निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। राज्य में इससे पहले नवंबर 2022 में नालंदा के वेना प्रखंड में एक निर्माणाधीन पुल, जून 2022 में सहरसा में कोसी तटबंध पर बना पुल और मई 2022 में पटना के फतुहा में 136 साल पुराना ऐतिहासिक पुल ढह गया था। इसके अलावा सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा नदी पुल हादसा, सारण में अंग्रेजों के जमाने का पुल गिरना और बिहटा-सरमेरा फोरलेन का हादसा भी शामिल है। मार्च 2024 में सुपौल के बकौर-भेजा पुल का स्पैन गिरा था और हाल ही में मई 2026 को भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का स्पैन नदी में समा गया था।

इस पूरे संकट से निपटने के लिए आईआईटी पटना ने भी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के निर्देश पर 250 मीटर से बड़े 85 पुलों की विशेष जांच की है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर और भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेजों की भी मदद ली गई है, जबकि विभाग के अपने इंजीनियरों ने जमीन पर उतरकर करीब 3,600 पुलों को जांचा है। कई पुलों की बेयरिंग बदली जा रही है और जहां सरिया दिखाई दे रहा था, वहां तुरंत प्लास्टर कर सुरक्षा मजबूत की जा रही है ताकि आम जनता का सफर पूरी तरह सुरक्षित रहे।