बिहार में सरकारी जमीनों के अवैध हस्तांतरण और रिकॉर्ड्स में हेराफेरी को रोकने के लिए सम्राट सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक के बाद साफ कर दिया है कि सरकारी संपत्ति की बंदरबांट को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी जमीन गलत तरीके से किसी निजी व्यक्ति के नाम दर्ज पाई गई, तो इसके लिए सीधे तौर पर अंचल और जिला स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार मानकर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
इस व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नया और कड़ा कानून विधानसभा में पेश करने जा रही है। प्रशासनिक पारदर्शिता लाने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए राजस्व विभाग डिजिटल मैकेनिज्म को पूरी तरह अनिवार्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं इस समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु और इसके प्रशासनिक मायने।
तीन जिलों की गहन समीक्षा: रडार पर पटना, रोहतास और सुपौल
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सबसे पहले सुपौल, रोहतास और पटना जिलों के राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इन जिलों में सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड्स की स्थिति और म्यूटेशन के लंबित मामलों पर कड़े निर्देश जारी किए गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के विकास की दिशा इस बात से तय होती है कि हमारी जमीन का प्रबंधन कितना सही है। इसलिए सभी सरकारी भूखंडों का रिकॉर्ड हर हाल में दुरुस्त होना चाहिए। सरकारी जमीन की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही या भू-माफियाओं से मिलीभगत पाए जाने पर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
केवल ऑनलाइन माध्यम से होंगे जमीन संबंधी कार्य
भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए विभाग ने मैन्युअल प्रक्रियाओं को खत्म कर शत-प्रतिशत डिजिटल सिस्टम अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत निम्नलिखित योजनाओं और तकनीकी सुधारों की समीक्षा की गई:
म्यूटेशन डिफेक्ट चेक और ऑनलाइन म्यूटेशन: दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए डिफेक्ट चेक को अनिवार्य किया गया है।
परिमार्जन प्लस और ई-मापी: रैयतों और सरकारी जमीनों की डिजिटल मापी (ई-मापी) तथा पुराने रिकॉर्ड्स के डिजिटलाइजेशन के लिए ‘परिमार्जन प्लस’ अभियान में तेजी लाने को कहा गया है।
गवर्नमेंट लैंड वेरिफिकेशन और राजस्व महा-अभियान: सभी सरकारी भूखंडों का भौतिक और डिजिटल वेरिफिकेशन किया जा रहा है ताकि उनकी घेराबंदी कर उन्हें अतिक्रमण से मुक्त रखा जा सके।
अभियान बसेरा: भूमिहीन परिवारों को वास (आवास) की भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
डीएम और एडीएम करेंगे नियमित मॉनिटरिंग
बैठक के दौरान विभाग के सचिव जय सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि लोक शिकायत निवारण (Public Grievance), सहयोग शिविर, फॉर्मर रजिस्ट्रेशन और आरसीएमएस (RCMS) के विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े भूमि संबंधी मुकदमों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा के भीतर किया जाए। मंड्री डॉ. जायसवाल ने कहा कि, अगली समीक्षा बैठक में हर स्तर पर जिलों की रैंकिंग में सुधार दिखना चाहिए। जिलाधिकारियों (DM) और अपर समाहर्ताओं (ADM) को इसकी खुद नियमित रूप से मॉनिटरिंग करनी होगी। लापरवाह कर्मियों को चिन्हित कर सीधे रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाए।
क्या नए कानून से थमेगा बिहार का जमीन विवाद?
बिहार में होने वाले अधिकांश आपराधिक मामलों और आपसी रंजिश की जड़ में जमीन का विवाद ही होता है। ऐसे में राजस्व मंत्री का यह कड़ा रुख और नया कानून लाने का वादा प्रशासनिक सुधार के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस नीति की सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि निचले स्तर (अंचल कार्यालय और राजस्व कर्मचारी) पर सालों से जमे सिंडिकेट को कैसे तोड़ा जाता है। केवल ऑनलाइन व्यवस्था कर देने से तब तक सुधार संभव नहीं है, जब तक डीएम और एडीएम स्तर से इसकी दैनिक मॉनिटरिंग नहीं होती। अफसरों के लिए रैंकिंग और सख्त कार्रवाई का यह डर अगर जमीन पर लागू हुआ, तो आम जनता को ब्लॉक के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिल सकती है।
































