परबत्ता :पारंपरिक खेती की बदली तस्वीर, खगड़िया में मखाना बना किसानों की नई उम्मीद

खगड़िया । परबत्तागोगरी प्रखंड अंतर्गत सर्किल नंबर एक के धर्मस्थान बहियार में इस बार खेती की तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। जहां हर साल कोसी नदी के पानी से लगभग 100 एकड़ खेत डूबे रहते थे। वहीं अब किसान पारंपरिक फसलों को छोड़ मखाना की खेती कर रहे हैं।

पहले हालात यह थे कि पानी देर से निकलने के कारण समय पर रबी फसल की बुआई नहीं हो पाती थी। अगर किसी तरह खेती होती भी थी तो फरवरी में लगाए गए मक्का की फसल तैयार होने से पहले ही बारिश शुरू हो जाती थी। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था।इस समस्या का समाधान खोजते हुए किसानों ने इस बार मखाना की खेती को अपनाया है। किसान पंकज यादव और सनोज यादव ने बताया कि उन्होंने करीब पचास बीघा जमीन में मखाना की खेती की है। उनका मानना है कि यह फसल जलजमाव वाले क्षेत्रों के लिए काफी उपयुक्त है और इससे आय भी बेहतर हो सकती है। मखाना की खेती से उन्हें उम्मीद है कि उनकी आमदनी पहले के मुकाबले दोगुनी होगी।हालांकि, इस नई पहल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। मखाना के बीज लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मजदूरों की कमी है। इसके कारण किसानों को कटिहार जिला से मजदूर बुलाने पड़े, जिससे लागत बढ़ गई। मजदूरी ज्यादा होने के बावजूद किसान इस खेती को भविष्य के लिए लाभकारी मान रहे हैं।कुल मिलाकर, धर्मस्थान बहियार में मखाना की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। यदि सरकार और कृषि विभाग से तकनीकी सहायता और मजदूर प्रशिक्षण की व्यवस्था हो जाए, तो यह क्षेत्र मखाना उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।